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CM हरीश रावत ने सरकारी तंत्र को किया 'टाइट'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 17 Dec 2014 01:11 PM IST
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को सरकारी तंत्र में लगी जंग छुड़ाने के लिए खुद ही आगे आना पड़ा।
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अचानक सचिवालय पहुंचे रावत
सीएम मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे अचानक सचिवालय पहुंचे। सीएम की खोज शायद उन फाइलों की थी जिन पर उन्होंने त्वरित निस्तारण या तत्काल कार्रवाई जैसी टिप्पणी लिखी है।
पांच से छह कार्य दिवस होने के बाद सचिवालय में फाइलों का निस्तारण बढ़ने की बजाय घटा है। न तो अधिकारी समय पर पहुंच रहे और न ही कर्मचारी। लिहाजा सीएम ने सीएस के साथ सचिवालय में छापेमारी की योजना तैयार की।
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सीएम और फिर आलाधिकारियों की ओर से अनुभागों में हुई छापेमारी से सचिवालय में हड़कंप मच गया। आलाधिकारियों ने अपने मातहत और कर्मचारियों को मोबाइल पर सूचना देकर सतर्क किया। मुख्य सचिव एन. रविशंकर सचिवालय में मौजूद थे।
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सीएम के सचिवालय पहुंचते ही अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव अपने-अपने कार्यालयों में दस बजे तक मुस्तैद हो गए थे। सीएस ने आलाधिकारियों को अपने-अपने विभागों से संबंधित अनुभागों के निरीक्षण के निर्देश दिए।
खुद सीएस ने भी कुछ जगहों का मुआयना किया। दस बजते ही आलाधिकारी अनुभाग में पहुंच गए। कक्ष में पहले से बैठे आलाधिकारी को देखकर देर से आए कर्मचारियों के पसीने छूट गए। सहयोगियों को मैसेज भेजकर तत्काल पहुंचने को कहा।
सीएस ने सभी विभागाध्यक्षों से दो दिनों में अनुभागों के निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर और अन्य अनियमितता पर रिपोर्ट मांगी है। हालांकि पहला मौका होने के कारण कर्मचारियों को चेतावनी देकर छोड़ने की बात कही जा रही है। जबकि निरीक्षण का विशेष अभियान आगे भी चलता रहेगा।
बेसिक शिक्षा
अपर सचिव एस. राजू ने बेसिक शिक्षा विभाग का निरीक्षण किया। इस दौरान एक महिला समीक्षा अधिकारी काफी देर से पहुंचीं। बताते हैं कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के तौर एक दिन की सर्विस ब्रेक या एक दिन के वेतन की कटौती की संस्तुति हो सकती है।
वन विभाग
सबसे दिलचस्प नजारा वन विभाग का रहा। प्रमुख सचिव डा. रणवीर सिंह दस बजे जाकर बैठ गए थे। जबकि 11 बजे तक विभाग में कोई नहीं पहुंचा था। इस पर प्रमुख सचिव ने कार्रवाई से संबंधित अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को शाम को ही भेज दी।
वित्त विभाग
अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने वित्त विभाग का निरीक्षण किया। वित्त विभाग में तमाम महत्वपूर्ण फाइलें रुकी हुई हैं। जिसके चलते सीएम की कई घोषणाएं जमीन पर नहीं उतर पा रही हैं। वित्त विभाग में कुछ कर्मचारी देरी से पहुंचे। वहीं प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने चिकित्सा शिक्षा और प्रमुख सचिव गृह एमएच खान ने भी अपने-अपने विभागों को निरीक्षण किया।
सीएम के निर्देश वाली फाइलें भी फंसी
सीएम हरीश रावत के पास लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं कि उनके निर्देश और टिप्पणी वाली फाइलें भी रुकी हुई हैं। जिसके चलते जिन लोगों को आर्थिक मदद देने की स्वीकृति मिली है वे भटक रहे हैं।
वहीं छोटे छोटे कामों को मिली स्वीकृतियों की फाइलें भी लटकी हुई हैं। सीएम ने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव और आलाधिकारियों को स्पष्ट तौर पर कहा है कि निचले स्तर पर जिम्मेदारी ठहराने की बजाय खुद उसके निस्तारण में तेजी कैसे लाई जाए ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करें।
विभागों को औचक निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इससे पता चलेगा कि कितने लोग समय पर नहीं आए। कब से कितनी फाइलें रुकी हैं आदि से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। संबंधित विभाग खुद अनुशासनात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे।
- एन. रविशंकर मुख्य सचिव