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चारधाम यात्रा को और सेफ बनाएंगे हाईटेक तरीके

Sat, 30 Jan 2016 01:57 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 30 Jan 2016 01:57 PM IST
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chardham yatra will be more safe.

खराब मौसम, भूस्खलन, यातायात की समस्याओं आदि से अब चारधाम यात्रियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। पर्यटन विभाग चार धाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए 12.50 करोड़ रुपये की लागत से ऋषिकेश में कंट्रोल रूम बनाने जा रहा है।

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इसमें यात्रा से संबंधित सभी जानकारियां तो मिलेंगी ही मार्ग पर आने वाले खतरे से यात्रियों को पहले ही आगाह कर दिया जाएगा। इसके लिए पर्यटकों की गाड़ियों में एक चिप लगाया जाएगा, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस होगी, ताकि मौसम, मार्ग की स्थिति आदि की जानकारी उन्हें चारधाम पहुंचने से पहले ही मिलती रहे।
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पर्यटन विभाग की ओर से ऋषिकेश में चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कार्यालय एवं ट्रांजिट कैंप बनाया जा रहा है। इसके लिए वन विभाग से 3.70 हेक्टेयर भूमि ले ली गई है। 12.50 करोड़ की लागत से यहां 20 यात्रा जानकारी काउंटर बनाए जाएंगे। चारों धामों की कनेक्टिविटी इस सेंटर से रखी जाएगी ताकि वहां का मौसम अपडेट सेंटर पर पहुंचता रहा। मौसम अपडेट सेंटर पर फ्लैश होता रहेगा।
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लोकेशन के लिए गाड़ियों में लगेगी चिप
यात्रियों की गाड़ियों को ट्रेस करने के लिए चिप लगाई जाएगी। इससे यात्रियों की लोकेशन ट्रेस की जाएगी और उन्हें समय-समय पर आगे की जानकारी दी जाएगी। कोई खतरा होने या मौसम खराब होने पर उन्हें पहले ही रुकने के निर्देश दे दिए जाएंगे।

गाड़ियों की लोकेशन ट्रैस होने से चारधाम पहुंचने वाले ट्रैफिक की स्थिति का भी पता किया जाएगा। यदि वहां वाहनों का ज्यादा दबाव बढ़ा तो पीछे से जाने वाले वाहनों को पहले ही रोक दिया जाएगा। यदि चारधामों में यात्रियों के रुकने की व्यवस्था नहीं है तो यात्रियों को इसकी भी जानकारी दे दी जाएगी। सेंटर में अलग से आपदा केंद्र और मौसम केंद्र बनेगा। इन काम मौसम पर नजर रखना और समय-समय पर अपडेट देना होगा। यात्रियों के बैठने के लिए सुविधायुक्त वेटिंग रूम भी बनेगा।

अभी छोटा है सेंटर
ऋषिकेश में अभी चारधाम यात्रा से संबंधित जानकारी देने के लिए एक सेंटर है, लेकिन यह बेहद छोटा है। यहां सभी तरह की जानकारियां उपलब्ध नहीं हो पाती है। नए सेंटर में व्यवस्थित तरीके से एक ही जगह पर पर्यटकों को कई तरह की जानकारियां मिल जाएंगी। साथ ही यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।


इनका है कहना
इस योजना में पचास फीसदी केंद्र और पचास फीसदी राज्य सरकार धनराशि देगी। भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। ऋषिकेश में ली गई भूमि की जगह वन विभाग को चकराता में भूमि दे दी गई है। चिप लगाकर यात्रियों को ट्रेस करने के पीछे मकसद यही है कि उन्हें हर तरह की आपदा या नुकसान से बचाया जा सके। बीच रास्ते में फंसने की जगह उन्हें ऐसी जगह रुकने को कह दिया जाएगा जहां उन्हें रहने को होटल मिल सके।
-वाईके गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी

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