चारधाम की वजह से गिरी उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय
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उत्तराखंड की कुल कमाई का करीब 20 प्रतिशत देने वाली चार धाम यात्रा की गाड़ी चल तो पड़ी है, पर पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाई है।
चार धाम यात्रा की बदौलत ही चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिले अन्य पर्वतीय जिलों से आगे रहते आए हैं, जून 2013 की आपदा के कारण अब ये जिले तेजी से पिछड़ते जा रहे हैं।
प्रदेश की कुल आय या जीडीपी में पर्यटन का हिस्सा करीब 30-35 प्रतिशत तक आंका जाता है। इसमें चार धाम यात्रा का हिस्सा भी करीब 20 प्रतिशत तक माना जाता है। चार धाम यात्रा बंद होने पर प्रदेश सरकार ने करीब 12 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया था।
ऐसे में सरकार ने चार धाम यात्रा रोकने की बजाय जारी रखना बेहतर समझा, पर इस बारचार धाम यात्रा केवल दस प्रतिशत ही रह पाई। बहुत कम यात्रियों ने धामों का रुख किया।
केवल केदारनाथ पर रहा फोकस
बीच-बीच में यात्रा सड़क मार्ग अवरुद्ध होने से रुकती रही। केदारनाथ पर सरकार का फोकस रहा और ऐसे में गंगोत्री और यमुनौत्री अछूते ही रह गए।
बदरीनाथ सहित इन दोनों धामों में रुक-रुक कर यात्रा जारी रही। अगले साल भी चार धाम यात्रा अगर ढीली रही तो कम से कम चार जिलों के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता है। चार धाम यात्रा से जुड़े लोगों के मुताबिक यात्रा के छह माह पूरे साल भर का गुजारा और अन्य जरूरतों को पूरा करता है।
बढ़ रही मैदानी-पर्वतीयों जिलों के बीच खाई
योजना आयोग के अध्ययन के मुताबिक चमोली जिले की प्रति व्यक्ति आय करीब 33 हजार (पर्वतीय जिलों में सर्वाधिक) थी, जो अब घट गई है। इसी तरह उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिले की प्रति व्यक्ति आय भी घटी है।
वहीं ऊधमसिंहनगर में प्रति व्यक्ति आय करीब 50 हजार है। चार धाम यात्रा पटरी पर न आने से मैदानी और पर्वतीय जिलों के बीच की खाई तेजी से बढ़ रही है।