Chardham Yatra 2020: बदरीनाथ हाईवे तोताघाटी में खुला, एसडीएम लेंगी वाहनों की आवाजाही का निर्णय
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तोताघाटी में छह महीने से बंद ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे शुक्रवार शाम करीब छह बजे खोल दिया गया है। हाईवे के दिन में खुलने की उम्मीद थी, लेकिन लगातार मलबा आने से दिन में रास्ता नहीं खुल सका।
पीडब्लूडी के सहायक अभियंता बीएन द्विवेदी ने बताया कि सड़क को आवागमन के लायक बना दिया गया है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम कीर्तिनगर शनिवार को मार्ग का निरीक्षण करेंगी। इसके बाद तय किया जाएगा कि इस रास्ते पर वाहनों की आवाजाही शुरू की जाएगी या नहीं।
गुरुवार रात ब्लास्टिंग के बाद मलबा साफ कर ठेकेदारों ने रास्ता समतल कर दिया था। लेकिन देर रात फिर से अचानक चट्टान टूटने से सड़क पर भारी मात्रा में मलबा आ गया और रास्ता बंद हो गया। मशीनें दिन भर मलबे को साफ करती रहीं, तब जाकर शाम को रास्ता खुल सका।
वहीं, लगातार मलबा और चट्टान टूटने से अब पीडब्लूडी ने ब्लास्टिंग करने का विचार छोड़ दिया है। हालांकि लगभग 20 मीटर के पैच में सड़क की चौड़ाई फिलहाल तीन से चार मीटर ही रहेगी। हालांकि टीम ने रास्ता खोल दिया है। लेकिन जिस तरह से बार-बार चट्टाने टूटकर गिर रही हैं उससे इस रास्ते पर आवाजाही खतरे से खाली नहीं है।
खलिया टॉप और मुनस्यारी में अब नहीं होगी रात्रि कैंपिंग
खलिया टॉप और मुनस्यारी क्षेत्र में रात्रि कैंपिंग पूरी तरह वर्जित रहेगी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब पर्यटन नगरी में किसी भी प्रकार की रात्रि कैंपिंग नहीं हो सकेगी। क्षेत्र में उच्च ध्वनि का संगीत और अनावश्यक ध्वनि प्रदूषण फैलाना भी वर्जित होगा।
मुनस्यारी में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों की पहली पसंद बुग्याल होते हैं। लगातार आवाजाही और बुग्यालों में अजैविक कूड़ा-करकट छोड़ने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसे देखते हुए अब वन विभाग ने रात्रि कैंपिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
वन क्षेत्र अधिकारी लवराज सिंह पांगती ने बताया कि खलिया बुग्याल में कैंपिंग की अनुमति वन क्षेत्र अधिकारी से प्राप्त करनी होगी। इसके लिए एक सप्ताह पहले आवेदन करना होगा। आवेदनपत्र पर विचार के बाद शर्तों के साथ कैंपिंग की अनुमति दी जाएगी।
कैंपिंग के लिए अधिकृत पर्यटकों को अपने साथ लाए गए जैविक और अजैविक सामग्रियों की सूची टूरिस्ट एंट्री काउंटर पर दर्ज करानी होगी। खलिया प्रवेश द्वार के भीतर किसी भी प्रकार का कैंप फायर वर्जित होगा। इसके लिए वन विभाग लगातार निगरानी भी करेगा।