चारधाम यात्रा: रावल का कोविड टेस्ट कराना ही पर्याप्त, सेल्फ क्वारंटीन में ही रहते हैं वह
तीर्थ पुरोहित महापंचायत का कहना है कि बदरीनाथ धाम के रावल परंपरा के अनुसार सेल्फ क्वारंटीन (एकांतवास) में ही रहते हैं। ऐसे में उनका कोरोना टेस्ट कराना ही पर्याप्त है। टेस्ट निगेटिव आने पर रावल को पूजा करने दी जा सकती है। वैैसे भी रावल सबसे अलग रहकर ही पूजा करते हैं।
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में कपाट के खुलने के समय रावल की ओर से ही पूजा कराए जाने का प्रावधान है। इस बार रावल केरल से बीस अप्रैल को उत्तराखंड में पहुंच रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि राज्य में बाहर से आने पर किसी भी व्यक्ति को 14 दिन के क्वारंटीन में रखने का आदेश है। ऐसे में रावल को भी 14 दिन के क्वारंटीन में रहना होगा।
इधर तीर्थ पुरोहित महापंचायत अध्यक्ष कृष्णकांत और महामंत्री हरीश डिरी का कहना है कि परंपरा के अनुसार राज्य से बाहर जाने पर रावल सेल्फ आइसोलेशन में ही रहते हैं। उनके कमरे में कोई जा भी नहीं सकता और न ही रावल किसी को छू सकते हैं।
केरल में भी रावल क्वारंटीन में ही रहे
केरल में भी रावल क्वारंटीन में ही रहे। ऐसे में रावल का कोरोना संक्रमण टेस्ट कराना पर्याप्त है। फिर भी उनका निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा सकता है।
महापंचायत का यह भी कहना है कि अगर कोई तरीका नहीं निकलता है तो टिहरी राज परिवार को यह तय करने दिया जाए। टिहरी राजा को यह अधिकार है कि वह आपात समय में व्यवस्था निर्धारित करे।
पूर्व में भी टिहरी राजपरिवार ने ही रावल की परंपरा शुरू की थी। पूर्व में धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने भी कहा था कि रावल का कोरोना संक्रमण टेस्ट करा लिया जाए। टेस्ट निगेटिव आता है तो उन्हें पूजा करने दी जाए।