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नेपाल सीमा से लगे गुरु गोरखनाथ धाम में मिलता है राख का प्रसाद, सतयुग से जलती आ रही अखंड धूनी
Sat, 06 Feb 2021 03:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 06 Feb 2021 03:30 PM IST
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गुरु गोरखनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के मंच में स्थित गुरु गोरखनाथ धाम अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि धाम में सतयुग से अखंड धूनी जलती आ रही है।
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श्रद्धालुओं में बांटा जाता है राख को प्रसाद के रूप में
इसी अखंड धूनी की राख को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। मंदिर की अखंड धूनी में जलाई जाने वाली बांज की लकड़ियां पहले धोई जाती हैं। धाम में नाथ संप्रदाय के साधुओं की आवाजाही रहती है।
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चंपावत से 40 किमी दूर यह स्थान ऊंची चोटी पर है। यहां पहुंचने के लिए मंच तक वाहन से जाया जा सकता है। उसके बाद दो किमी पैदल चलना पड़ता है। कहा जाता है कि सतयुग में गोरख पंथियों ने नेपाल के रास्ते आकर इस स्थान पर धूनी रमाई थी।
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सतयुग से धूनी प्रज्ज्वलित है यहां
हालांकि, धूनी का मूल स्थान पर्वत चोटी से नीचे था, लेकिन बाद में उसे वर्तमान स्थान पर लाया गया। मान्यता है कि यहां सतयुग से धूनी प्रज्ज्वलित है।
400 वर्ष पूर्व चंद राजाओं की ओर से चढ़ाया गया घंटा भी मौजूद
धाम के महंत सोनू नाथ के अनुसार सतयुग में गुरु गोरखनाथ ने यह धुनी जलाई थी। मंदिर में करीब 400 वर्ष पूर्व चंद राजाओं की ओर से चढ़ाया गया घंटा भी मौजूद है।
बड़ी संख्या में धाम में पहुंचते हैं निसंतान दंपती
मंच में स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर आध्यात्मिक पीठ के रूप में पूरे उत्तर भारत में प्रमुख है। धाम में बड़ी संख्या में निसंतान दंपती पहुंचते हैं।
गुरु गोरखनाथ धाम को गोरक्षक के रूप में भी पूजा जाता है
गोरख पंथियों की ओर से स्थापित गुरु गोरखनाथ धाम को गोरक्षक के रूप में भी पूजा जाता है। क्षेत्र की कोई भी उपज हो या दूध, सबसे पहले धाम में चढ़ाया जाता है।
400 वर्ष पूर्व चंद राजाओं की ओर से चढ़ाया गया घंटा भी मौजूद
धाम के महंत सोनू नाथ के अनुसार सतयुग में गुरु गोरखनाथ ने यह धुनी जलाई थी। मंदिर में करीब 400 वर्ष पूर्व चंद राजाओं की ओर से चढ़ाया गया घंटा भी मौजूद है।
बड़ी संख्या में धाम में पहुंचते हैं निसंतान दंपती
मंच में स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर आध्यात्मिक पीठ के रूप में पूरे उत्तर भारत में प्रमुख है। धाम में बड़ी संख्या में निसंतान दंपती पहुंचते हैं।
गुरु गोरखनाथ धाम को गोरक्षक के रूप में भी पूजा जाता है
गोरख पंथियों की ओर से स्थापित गुरु गोरखनाथ धाम को गोरक्षक के रूप में भी पूजा जाता है। क्षेत्र की कोई भी उपज हो या दूध, सबसे पहले धाम में चढ़ाया जाता है।