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जनगणना ने छीन ली गरीबों की 'रोटी'
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 08 Oct 2013 11:17 AM IST
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खाद्य सुरक्षा योजना में शुरूआत से ही कुछ न कुछ लापरवाही सामने आ रही है। कहने को तो यह योजना गरीबों के लिए हैं, लेकिन जनगणना 2011 की वजह से सैकड़ों गरीबों के पेट पर 'लात' पड़ सकती है।
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जनगणना के आंकडों में कई गांवों में पलायन के बाद जनसंख्या आधी से भी कम दर्शाई गई है, जबकि इन गांवों में आबादी दोगुनी तक बढ़ चुकी है।
इन गांवों में अंधेर
रायपुर ब्लॉक के लाडपुर गांव में वर्ष 2008 में जनसंख्या 4684 थी, लेकिन जनगणना 2011 के आधार पर खाद्य सुरक्षा योजना में यहां की आबादी 1478 ही मानी जा रही है, जबकि पांच साल में आबादी करीब दोगुनी हो चुकी है।
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अस्थल गांव की प्रधान सुनीता बिष्ट ने बताया कि गांव में सौ से अधिक परिवार हैं, लेकिन आंकड़ों में यहां 52 ही परिवार दिखाने से करीब 35 परिवारों को ही लाभ मिलेगा, जबकि प्रधान के मुताबिक 65 परिवार योजना के लिए पात्र हैं।
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1200 लोग वंचित रह जाएंगे
सुंदरवाला की प्रधान सुनीता थापा बताती हैं कि गांव में सात हजार की आबादी के विपरीत आंकड़ों में 4100 लोग ही दर्ज किए गए हैं, इस आधार पर करीब 3000 लोगों को ही लाभ मिल पाएगा, जबकि करीब 1200 लोग वंचित रह जाएंगे।
हमारे गांव में 1027 परिवार योजना के तहत पात्र हैं। लेकिन आंकड़ों में आबादी घटाने के बाद सिर्फ 195 राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं। डीएम से सभी पात्र परिवारों को लाभ देने की मांग की गई है।
- कपिल बोहरा, ग्राम प्रधान लाडपुर