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अब किशोर उपाध्याय मुख्यमंत्री रावत से नाराज, दिल्ली में खोला मोर्चा

Wed, 08 Jun 2016 08:47 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 08 Jun 2016 08:47 AM IST
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kishore upadhyay angry from harish rawat
किशोर उपाध्याय और हरीश रावत - फोटो : file photo

उत्तराखंड सरकार और कांग्रेस संगठन के बीच शुरू हुई तकरार दिल्ली तक पहुंच गई है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने इशारों-इशारों में ही दिल्ली में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

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कहा कि सरकार में पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रही है। बोले, मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से दूरी बना लेते हैं जो स्वस्थ परंपरा नहीं है।
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प्रदेश अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का ही परिणाम रहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी 44 सीटों पर सिमट कर रह गई है। प्रदेश अध्यक्ष ने आलाकमान को आगाह करते हुए कहा है कि उत्तराखंड में जल्द ही विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है।
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किशोर ने कहा कि संगठन पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान मिले इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं से प्रतिदिन दो घंटे समय दें इस संबंध में अवगत कराया गया है।

किशोर के रुख से सरकार, मंत्री, विधायक भौचक

kishore upadhyay angry from harish rawat
किशोर उपाध्याय - फोटो : amar ujala

प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पिछले कई दिन से जिस तरीके से मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों पर हमला बोला है उससे सभी भौचक हैं। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की की तर्ज पर उन्होंने संगठन पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को ज्यादा से ज्यादा तवज्जो देने के साथ ही उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया है।

सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से साफतौर पर कह है कि समय पर मुलाकात नहीं करने और उपेक्षा करने वाले मंत्रियों, विधायकों से मिलना जुलना बंद करें।

आखिर इतने नाराज क्यों हैं किशोर 
किशोर उपाध्याय की नाराजगी के पीछे राज्यसभा चुनाव में उनकी अनदेखी भी है। सूत्रों के अनुसार पार्टी में बगावत के बाद प्रदेश अध्यक्ष उपाध्यक्ष राज्यसभा के लिए प्रबल दावेदार भी थे।

गढ़वाल मंडल में पार्टी में नेताओं की कमी के चलते कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री रावत उन्हें राज्यसभा सांसद बना सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनकी जगह मुख्यमंत्री रावत के करीबियों में से एक पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को राज्यसभा का टिकट दे दिया गया।

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