कैग का खुलासा: उत्तराखंड में बुजुर्गों की पेंशन योजना में करोड़ों का गड़बड़झाला
- मुर्दों को भी बांट दी पेंशन, जो बीपीएल नहीं उन्हें भी दिया पेंशन का लाभ
- सोशल ऑडिट और शिकायत दर्ज कराने तक का तंत्र लागू नहीं पाया
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विस्तार
समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था पेंशन योजना में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर की है। कैग ने पाया कि योजना की चयन प्रक्रिया खामियों से भरी थी। इन कमियों के चलते विभाग ने पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में मृतकों को एक माह से लेकर साढ़े छह साल तक भेजी जाती रही। इससे 10.35 लाख रुपये की वित्तीय हानि हुई।
कैग ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के डेटा बेस की जांच में पाया कि 1,17,454 लाभार्थियों में से केवल 49,924 के मामलों में ही बीपीएल पहचान संख्या अंकित थी। शेष 67,530 लाभार्थियों ने बीपीएल पहचान संख्या नहीं दी। इनमें से 8,134 लाभार्थियों के अभिलेखों की जांच में 76 प्रतिशत यानी 6184 ऐसे लोगों को भी पेंशन बांट दी गई, जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं थे। इससे विभाग को 7.25 करोड़ की चपत लगी। 614 प्रकरणों में विभाग ने 17 लाख रुपये अधिक भुगतान किया, जबिक 85 लाभार्थियों को डबल पेंशन देकर 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि की।
गलत आकलन से 87.89 करोड़ का बोझ पड़ा
लाभार्थियों के गलत आकलन से विभाग पर 87.89 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान सरकार ने 7,65,599 लाभार्थियों के लिए 235.08 करोड़ की मांग की। इसके सापेक्ष उसे 180.48 करोड़ रुपये मिले। लेकिन विभाग ने 6,46,687 लाभार्थियों को 268.37 करोड़ वितरित किए। इसके चलते राज्य सरकार पर 87.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऐसा 33.29 करोड़ रुपये केंद्र से कम मांग के कारण हुआ।
11.08 करोड़ का राज्यांश नहीं लौटाया
विभाग में पेंशन भुगतान के लिए 12.36 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। ये धनराशि न तो बांटी गई न सरकार को समर्पित की गई। इसमें राज्यांश 11.08 करोड़ रुपये और केंद्राश 1.28 रुपये था। कैग को विभाग ने जवाब नहीं दिया कि पांच जिला कोषागारों में यह धनराशि क्यों पड़ी रही?
पेंशनर की आयु 901 साल
कैग ने विभाग के राष्ट्रीय सूचना केंद्र के सहयोग से बनाए गए ईएसपीएएन साफ्टवेयर में डेटाबेस की गंभीर खामियां उजागर की। कैग ने पाया कि आयु कालम में 901 वर्ष तक की आयु को देखा गया। 4000 रुपये से अधिक की राशि के इनपुट को रोकने के लिए इनपुट कंट्रोल की कमी थी। मोबाइल नंबर बीपीएल डेटाबेस से लिंक, प्रणाली में एक हजार तक प्रति व्यक्ति पेंशन सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं था। पुत्र की मासिक आय व पुत्र व्यवसाय कालम में शून्य है, जबकि यह पेंशन की पात्रता का अहम मानक है।
4,000 रुपये से अधिक मासिक आय वालों को भी पेंशन
सरकार के निर्णय के अनुसार 4000 रुपये तक की मासिक पारिवारिक आय वालों को पेंशन का लाभ मिलता है। लेकिन विभाग ने मानकों की अनदेखी कर 2015-16 से 2017-18 के दौरान 295 लोगों को 83 लाख रुपये की पेंशन स्वीकृत कर दी।
पति पत्नी को भी पेंशन
अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़ व यूएसनगर में 1147 मामलों में पति और पत्नी को 4.18 करोड़ रुपये की पेंशन बांट दी गई।
पेंशन का बकाया भुगतान नहीं किया
कैग ने पाया कि वर्ष 2017-18 में चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और यूएस नगर में 34,551 लाभार्थियों को धन की कमी के चलते 15.25 करोड़ रुपये की बकाया पेंशन का भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2016 में 6,703 बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई। आधार कार्ड की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद बकाया पेंशन 7.79 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया।
ये कमियां भी उजागर
- पेंशन मामलों के अनुश्रवण व मूल्यांकन के लिए राज्य और जिलास्तर पर समितियां नहीं बनाई गई। राज्य स्तरीय समिति मुख्य अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होनी है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति का गठन होना था। लेकिन लेखा अवधि में ये दोनों समितियां नहीं बनीं।
- कैग ने पाया कि विकास खंड, जनपद, नगर पालिका स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली का गठन नहीं किया गया। जबकि एनएसएपी के इसे लेकर दिशा-निर्देश हैं।
- एनएसएपी की गाइडलाइन के हिसाब से विभाग में सोशल ऑडिट की भी व्यवस्था नहीं थी। कैग ने भौतिक सत्यापन की भी कमी पकड़ी।