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विस उपचुनावः कांग्रेस ने तीनों सीट पर किया कब्जा

Fri, 25 Jul 2014 04:46 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Jul 2014 04:46 PM IST
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byelection effect on uttarakhand politics

उत्तराखंड के विधानसभा उपचुनाव में तीनों विधानसभा सीट कांग्रेस की झोली में आ चुकी हैं। धारचूला से मुख्यमंत्री हरीश रावत, डोईवाला से हीरा सिंह बिष्ट और सोमश्वर से रेखा आर्या ने जीत दर्ज की है।

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उत्तराखंड के विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धारचूला विधानसभा सीट से 31212 वोट पाकर जीत दर्ज कर ली है। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के बीडी जोशी को 10610 वोट मिले।
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डोईवाला से कांग्रेस प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट ने 32453 वोट पाकर जीत दर्ज कर ली है। मतगणना के शुरुआती दौर में आगे चल रहे बीजेपी प्रत्याशी त्रिवेंद्र रावत को 28283 वोट मिले हैं।
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सोमेश्वर से कांग्रेस प्रत्याशी रेखा आर्या ने 22996 वोट पाकर जीत दर्ज कर ली है। इसके साथ ही सोमेश्वर से बीजेपी प्रत्याशी मोहन राम को 13091 वोट मिले हैं।

मुख्यमंत्री को 31 जुलाई तक विधानसभा की सदस्या लेनी थी। बिना धारचूला गए मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी जीत दर्ज कर ली है।

गठबंधन पर पड़ सकता है खासा असर

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तीन विधानसभाओं में उपचुनाव के नतीजे शुक्रवार (आज) को आ रहे हैं, जिसके बाद कांग्रेस और प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के गठबंधन पर खासा असर पड़ सकता है।

कांग्रेस के बहुमत के करीब पहुंचने से सरकार में मंत्री पदों पर पीडीएफ की हिस्सेदारी कम होने की संभावना है।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी का पहले से दबाव बनाए हुए हैं, ऐसे में नतीजे तय करेंगे कि मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल किस कीमत पर होगा।

इसी के साथ पीडीएफ के कुछ सदस्यों की कांग्रेस में शामिल होने की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है।

बहुमत से चार विधायक कम होने के चलते कांग्रेस सरकार बचाए रखने के लिए सात विधायकों वाले गठबंधन पीडीएफ पर निर्भर है।

सरकार भी चाहती है पीडीएफ से मुक्ति

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उपचुनाव में कांग्रेस ने बहुमत के करीब पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी थी, जिससे सरकार की पीडीएफ पर निर्भरता कम हो सके।

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत की कैबिनेट से विदाई के बाद रिक्त हुआ पद पीडीएफ के हिस्से आया है जिससे सात सदस्यीय पीडीएफ के पास पांच मंत्रीपद हैं।

दरअसल कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट के बाहर रखना सरकार की मजबूरी है। सीएम हरीश रावत अपने कुछ करीबियों को कैबिनेट में जगह देना चाहते हैं। उपचुनाव में अगर कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहता है तो कैबिनेट में पीडीएफ का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।

पीडीएफ में हलचल तेज

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बसपा, उक्रांद और निर्दलीय विधायकों के पीडीएफ में उपचुनाव के बाद हलचल तेज हो गई है। अगर सरकार बहुमत के करीब पहुंचती है तो कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि पीडीएफ से किसी को कांग्रेस में शामिल करवा जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया जाए। कांग्रेस खुद को मजबूत करने के लिए सबसे कमजोर कड़ी निर्दलीय को मान रही है।

तीनों सीटों पर कांग्रेस को जीत मिलने से पीडीएफ कांग्रेस गठबंधन सरकार को मजबूती मिलेगी। उपचुनाव के जो भी नतीजे रहेंगे, उससे गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीडीएफ की हिस्सेदारी पहले की तरह ही रहेगी।
-मंत्री प्रसाद नैथानी, नेता पीडीएफ

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