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11 साल बाद मिली बचपन में बिछड़ी बहन, देखते ही छलक आई भाई की आंखें

Sat, 17 Sep 2016 09:52 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
ब्यूरो/ अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़) Updated Sat, 17 Sep 2016 09:52 PM IST
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brother and sister met after 11 year.
भूमिका बत्रा - फोटो : AmarUjala

11 साल बाद जब भाई तीन माह की नन्हीं उम्र में बिछड़ गई अपनी बहन से मिला तो उसके आंसू झलक पड़े। यह दृश्य देख वहां मौजूद सबकी आंखें नम हो गईं। बच्चों और महिलाओं के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था के प्रयासों ने 11 वर्ष पहले अनाथ हो चुके भाई-बहन को मिला दिया।

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मूल रूप से बरेली निवासी दीनू बत्रा 1997 में परिवार सहित धारचूला में आकर बस गए थे। 2005 में एक हादसे में दीनू बत्रा की मौत हो गई। कुछ दिन बाद बीमारी से उनकी पत्नी की भी मौत होने से उनके दो बच्चे अनाथ हो गए।
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इनमें से तब मात्र तीन माह की भूमिका बत्रा को नगर की एक महिला ने अपने पास रख लिया जबकि आठ साल का उसका भाई मोहित बत्रा एक दुकान में काम करने लगा।

आठ साल की उम्र में भूमिका को भिजवा दिया था दिल्ली

brother and sister met after 11 year.

बताते हैं कि बालिका को पालन-पोषण के लिए ले जाने वाली महिला ने बड़ी होने के बाद उसे स्कूल नहीं भेजा और घर का काम कराने लगी। बाद में जब बालिका आठ साल की थी तो किसी परिवार से संपर्क साधकर दिल्ली भिजवा दिया। वरदान संस्था की अध्यक्ष सुमन वर्मा की जानकारी में पिछले दिनों यह मामला आया तो उन्होंने उस महिला का पता लगाया, जिसने भूमिका को अपने पास रखा था।

साथ ही थाना प्रभारी बलवंत कंबोज को भी इस मामले की जानकारी दी। पुलिस के सख्ती से पूछताछ में महिला ने दिल्ली में उस घर का पता बता दिया जहां उसने भूमिका को भिजवाया था।

बहन को देखते ही भाई की आंखों से बहने लगे आंसू

brother and sister met after 11 year.
भूमिका बत्रा - फोटो : AmarUjala

सुमन वर्मा और उनके कुछ साथी चार दिन पहले पश्चिमी दिल्ली में उस पते पर पहुंच और शनिवार सुबह भूमिका बत्रा को लेकर सुमन धारचूला पहुंची। अब वह 11 साल की और उसका भाई मोहित बत्रा 19 साल का हो गया है।

मोहित अपना खुद का व्यवसाय चला रहा है। बहन को देखकर मोहित के आंसू छलक पड़े। उसने कहा कि वह अपनी बहन का पालन-पोषण करने में समर्थ है और उसकी पढ़ाई-लिखाई भी शुरू करेगा।

थानाध्यक्ष बलवंत कंबोज ने बताया कि मामले में किसी प्रकार के विवाद का शक नहीं था, इसलिए बच्ची को उसके भाई को सुपुर्द किया गया।

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