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उत्तराखंड विधानसभा में इस अस्त्र से कांग्रेस को घेरेगी भाजपा

Mon, 18 Jul 2016 08:51 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल-हल्द्वानी
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल-हल्द्वानी Updated Mon, 18 Jul 2016 08:51 AM IST
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bjp will stuck congress in assembly session
ajay bhatt - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड में कांग्रेस भले ही राष्ट्रपति शासन की कानूनी लड़ाई जीत जाने पर खुश हो, पर उसकी परेशानी का अंत फिलहाल होता नहीं दिख रहा है।

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18 मार्च को विधानसभा में सदन के अध्यक्ष के खिलाफ दिया गया अविश्वास प्रस्ताव आने वाले सत्र में एक और खींचतान का सबब बन सकता है। भाजपा नए सिरे से अविश्वास प्रस्ताव लाने से भले ही इनकार कर रही हो, पर सदन में दिए गए पुराने अविश्वास प्रस्ताव का मामला उठाने से उसे गुरेज नहीं है। विधानसभा सूत्रों की माने तो भाजपा अगर इस अविश्वास प्रस्ताव पर जोर देती है तो सदन में इस पर बात भी हो सकती है।
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रविवार को नैनीताल क्लब में मीडिया से मुखातिब, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और उपाध्यक्ष अनुसूइया प्रसाद मैखुरी के खिलाफ विधान सभा में अविश्वास प्रस्ताव लंबित है।
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जब तक इस अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता तब तक दोनों नैतिक रुप से संवैधानिक पीठ में नहीं बैठ सकते। 21 और 22 जुलाई को प्रस्तावित विधान सभा सत्र में  इसके लिए 20 जुलाई को दून में भाजपा विधायकों की बैठक में फैसला लिया जाएगा।

भाजपा और कांग्रेस के बीच होगी खींचतान

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uttarakhand assembly

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इस रुख से जाहिर है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच विधानसभा सत्र इस बार भी खींचतान का सबब बनने वाला है। विधानसभा सूत्रों के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव विधानसभा में लंबित है। ऐसे में भाजपा अगर इस अविश्वास प्रस्ताव पर जोर देती है, तो इस अविश्वास प्रस्ताव को सदन में लाना मजबूरी भी हो सकती है। ऐसा हुआ तो इस बार भी सदन में कांग्रेस और भाजपा के बीच  बहुमत परीक्षण के आसार बन जाएंगे।

भाजपा अभी तक हालांकि अपनी तरफ से विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से इनकार कर रही है। इतना होने पर पुराने अविश्वास प्रस्ताव का मुद्दा उठाकर भाजपा एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश में भी है। उधर, विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल का कहना है कि भाजपा अगर प्रस्ताव लाती है तो उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। इससे पहले यह भी देखा जाएगा कि नियम क्या हैं।

नियम यह है कि अविश्वास प्रस्ताव को 14 दिन के अंदर या फिर जो भी सत्र आहूत हो, उसमें सदन में रखा जाए। व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो सरकार के बहुमत परीक्षण के लिये एक सत्र आहूृत हो चुका है। भाजपा को चाहिये था कि इस सत्र में इस प्रस्ताव को रखती या स्पष्ट करती कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण हो रहे इस सत्र में इस प्रस्ताव को स्थगित कर अगला जो भी सत्र हो, उसमें रखा जाए। भाजपा ने ऐसी कोई भी बात नहीं की। सदन में भाजपा को अविश्वास प्रस्ताव पर अनुज्ञा मांगने के लिए भी बहुमत चाहिए होगा।
 - गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष

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