उत्तराखंडः आपदा घोटाले का खुलासा करने वाले ने फिर 'ललकारा'
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वैसे तो भूपेंद्र कुमार इंटर पास हैं, लेकिन सरकारी महकमों की बारीकियों और कारगुजारियों की उनकी जानकारी हैरान करने वाली है। उत्तराखंड के आपदा घोटाले की परतें उखाड़ कर ‘नेता नगरी’ की आंखों की किरकिरी बने भूपेंद्र कहते हैं कि राह में मुश्किलें बहुत आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
डेढ़ साल के संघर्ष के बाद आखिरकार सच सामने आ गया। कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। ये तो शुरुआत भर है। आगे भी इसी तरह काम करते रहेंगे। आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में भूपेंद्र की पहचान पहले से है, लेकिन आपदा घोटाले के खुलासे के बाद सत्ता के गलियारों तक उनका नाम गूंज गया।
वर्ष 2007 से वह जनता से जुड़े मामलों को सूचना के अधिकार के तहत सामने लाते रहे हैं। इस अवधि में वह 300 के करीब प्रकरणों को उठा चुके हैं, जिनमें से कई चर्चित रहे हैं।
ये मामले रहे चर्चित
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में सरकारी छात्रवृत्ति पर डाक्टरी की पढ़ाई करने के बाद बांड के मुताबिक पांच साल तक राज्य में सेवाएं नहीं देने वाले डॉक्टरों का मुद्दा उठाया था। इसके बाद 101 में 86 चिकित्सकों ने वापस आकर ज्वॉइनिंग दी थी। अन्य के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई की।
जन्माष्टमी मनाने के लिए बिना सहमति के पुलिस कर्मियों के वेतन से की जाने वाली कटौती भी भूपेंद्र ने आरटीआई के तहत मांगी थी। इस खुलासे के बाद यह बंद हो पाई। मानवाधिकार आयोग ने वेतन कटौती पर रोक लगा दी थी।
कालाढूंगी में शहीद हुए पुलिस कर्मियों के परिवार के लिए एकत्र की गई 45 लाख रुपए की धनराशि में 10 लाख रुपए दिए गए थे। आरटीआई के तहत जानकारी मिलने के बाद पता चला कि 35 लाख रुपए बचे थे। बाद में इस रकम का सदुपयोग हो पाया।
नगर निगम और नगर पालिकाओं में ठंड से बचाव के लिए अलाव और कंबल के बजट पर सवाल-जवाब के बाद प्रत्येक जिले के लिए 3 लाख से लेकर 5 लाख तक का वार्षिक बजट तय किया गया।
भूपेंद्र को मिले अब दो सुरक्षा कर्मी
आपदा घोटाले के खुलासे के बाद सुर्खियों में आए आरटीआई कार्यकर्ता भूपेंद्र कुमार को अब दो सुरक्षा कर्मी मिलेंगे। सोमवार को मिला गनर रात में चला गया था।
इसी बीच बाइक सवार दो संदिग्ध युवकों ने भूपेंद्र के बेटे को घेरने का प्रयास किया था। रात में पुलिस अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी थी। बुधवार सुबह भूपेंद्र ने सुरक्षा वापस करने की पेशकश की थी।
इसके बाद शासन से लेकर पुलिस अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे। एसपी सिटी अजय सिंह और आरटीआई कार्यकर्ता के बीच बातचीत हुई। इसके बाद भूपेंद्र को एक के बजाए दो गनर दे दिए गए।