हां, मैंने उत्तराखंड सीएम हरीश रावत से की सौदेबाजी: भीमलाल आर्य
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सूबे की राजनीति में पिछले कई माह से लगातार चर्चाओं में रहे घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य का खुलेआम कहना है कि सरकार बचाने के एवज में उन्होंने सीएम हरीश रावत से सौदेबाजी की है। लेकिन यह सौदेबाजी धन की नहीं वरन घनसाली के विकास के लिए की है।
कभी मीडिया के सामने सीएम रावत को पिता तुल्य बताने वाले घनसाली विधायक पिछले दिनों क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सीएम हाउस के गेट पर भूख हड़ताल के बाद कुछ बदले हुए नजर आ रहे हैं। उन्हें इस बात का खासा मलाल है कि वह दो दिन तक बारिश के बीच गेट पर धरने पर बैठे रहे लेकिन सीएम साहब ने उनकी कोई सुध नहीं ली।
हालांकि उन्हें अब भी पूरा एतबार है कि सीएम रावत उन्हें कांग्रेस पार्टी से टिकट दिलाएंगे। विधायक आर्य वैसे तो भाजपा को खुले मंच से कोसते नजर आते हैं लेकिन घर के बैठकखाने, बालकनी से लेकर कार्यालय में लगी पीएम मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी समेत भाजपा के कई नेताओं की तस्वीर यह हकीकत बयां करती हैं कि पार्टी से उनका पूरी तरह मोहभंग नहीं हुआ है।
अमर उजाला संवाददाता अरविंद सिंह ने पूर्व विधायक से राजनीति समेत तमाम मुद्दों पर बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश...
सवाल- सियासी संकट के दौरान आप बिक गए?
- हां यह सही है कि सियासी संकट के दौरान भाजपा ने मुझे खरीदने की कोशिश की, लेकिन मैं बिका नहीं। अलबत्ता घनसाली के विकास के लिए मैंने सीएम रावत से सौदेबाजी की। सीएम रावत ने मुझे खरीदा। लेकिन सौदेबाजी में घनसाली का विकास सर्वोपरि रहा।
सवाल - पिछले दिनों सीएम आवास गेट पर आपकी भूख हड़ताल क्या भाजपा की पर्दाफाश रैली को फ्लॉप करने की सीएम रावत और आपकी मिलीभगत तो नहीं?
- नहीं कोई मिलीभगत नहीं थी। मैं तो घनसाली क्षेत्र के विकास से जुड़े तमाम मु्दों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठा था। भाजपा की पर्दाफाश रैली से भूख का हड़ताल कोई लेनादेना नहीं है। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति को अपने तरीके से बात रखने का अधिकार है। मैंने भूख हड़ताल के जरिए अपनी बातों को सीएम रावत और सरकार तक पहुंचाया।
सवाल - विपक्षी भाजपा में होने के बावजूद आप हमेशा सीएम रावत और सरकार के साथ खडे़ रहे? क्या यह राजनीति का दोहरा चरित्र नहीं?
- मैं मर्यादित विकासपरक राजनीति में विश्वास करता हूं। जिस भावना के साथ भाजपा का दामन थामा था। वह मुझे कतई देखने को नहीं मिला। पार्टी ने सदैव हमारी उपेक्षा की। घनसाली की जनता की अपेक्षाओं पर भाजपा खरी नहीं उतरी। इसलिए भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा। जहां तक सीएम रावत का साथ देने का सवाल है तो उन्होंने घनसाली के विकास की बात की। इसलिए उनके साथ जुड़ा। सीएम ने क्षेत्र के विकास की पहल भी की है।
...और भी हैं सवाल
सवाल - आपकी छवि दलबदलू, मौकापरस्त नेता की रही है। पिछले कुछ महीनों के बीच हुई राजनीतिक उथल पुथल के दौरान भी यह छवि देखने को मिली?
- कुछ तथाकथित राजनीतिज्ञ जनता के साथ साथ मीडिया को भी गुमराह कर रहे हैं। जहां तक भाजपा को छोड़ सरकार और कांग्रेस से जुड़ने का सवाल है तो यह सब कुछ मैंने अपने लिए नहीं वरन घनसाली के विकास और वहां की जनता के लिए किया। सरकार को समर्थन देने के एवज में मैंने सीएम रावत से सौदेबाजी भी की। लेकिन यह सौदेबाजी रुपये पैसों की नहीं, वरन घनसाली के विकास को लेकर की। सीएम से मैंने घनसाली को जिला बनाने, बालगंगा को ब्लाक घोषित करने और घनसाली को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की मांग की। उन्होंने इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन भी दिया।
सवाल - भाजपा छोड़ने का कोई मलाल तो नहीं ? क्या कभी वापसी होगी?
- जी नहीं, भाजपा छोड़ने का कोई मलाल नहीं है। भाजपा ने मेरे साथ ही नहीं घनसाली की जनता के साथ अन्याय किया। जहां तक वापसी का सवाल है तो ऐसा मै सोच भी नहीं सकता।
सवाल - कांग्रेस से तो टिकट मिलेगा नहीं।
- ऐसा नहीं होगा। कांग्रेस हमे घनसाली सीट से टिकट देगी यह तय हैं। मैंने सब कुछ दांव पर लगातार सीएम रावत और कांग्रेस सरकार को बचाया है। ऐसे में कांग्रेस की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि पार्टी हमारी राजनीतिक कुर्बानियों को देखते हुए टिकट दे। कुछ कांग्रेसी हमारा विरोध कर रहे हैं। लेकिन ऐसे कांग्रेसी तब कहां थे? जब सरकार खतरे में थी। मुझे सरकार बचाने का पुरस्कार नहीं, वरन मेरे राजनीतिक त्याग का प्रतिफल मिलना चाहिए।
सवाल - आप हमेशा धरना प्रदर्शन कर दबाव की राजनीति करते हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते क्या बातचीत का रास्ता नहीं अख्तियार कर सकते?
- मैंने कभी भी दबाव की राजनीति नहीं की। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बाते कहने और मांगे मनवाने के लिए धरना प्रदर्शन एक सशक्त हथियार है। इस हथियार का मैंने कई बार इस्तेमाल किया और मुझे हर बार सफलता भी मिली है।
सवाल - राजनीति में आप हमेशा मोहरा बनते रहे। आप सीएम रावत का मोहरा बने? मोहरा बनने से अब तक आपको क्या हासिल हुआ?
- मैं कभी भी किसी का मोहरा नहीं बना। जहां तक सीएम रावत का सवाल है तो उनका भी मोहरा नहीं। मैंने कुछ राजनीतिक सिद्धांतों के चलते सीएम रावत और कांग्रेस का साथ दिया। बाकी इसके राजनीतिक मायने कुछ भी निकाले जा सकते हैं।
सवाल - सीएम रावत और सरकार से कोई मलाल?
- हां सीएम रावत से थोड़ा मलाल है। जब मैं सीएम हाउस के गेट पर भूख हड़ताल पर बैठा तो मुझे उम्मीद थी कि सीएम रावत तत्काल मुझसे वार्ता करने आएंगे। मेरी परेशानियों को पूछने के साथ वह तत्काल उनका निराकरण भी करेंगे। लेकिन मैं दो दिन तक बारिश में गेट पर भींगता रहा और वह नही आए। इसका थोड़ा मलाल है। लेकिन इतना होने के बावजूद मेरी निष्ठा में कोई कमी नहीं आयी है।