फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   bhai dooj shubh muhurat.

भाई-दूज पर बहनें करेंगी ऐसा तो बढ़ेगी भाई की उम्र

Fri, 13 Nov 2015 07:28 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 13 Nov 2015 07:28 AM IST
विज्ञापन
bhai dooj shubh muhurat.

भाई-दूज का त्योहार इस बार 13 नवंबर को है। इस दिन अगर बहनों ने यह शुभ काम किया तो भाई की उम्र बढ़ जाएगी।

विज्ञापन


भाई दूज पर सुबह 7.30 से 10.30 बजे तक अमृत की चौघड़िया में मनाना शुभ रहेगा। सुबह 10.30 से 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समय पर्व न मनाए। इसके बाद 12 बजे से 1.25 बजे दिन तक भी भाई-दूज का शुभ मुहूर्त रहेगा।

भाई-दूज का त्योहार कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। द्वितीया तिथि की शुरुआत 12 नवंबर को रात 12.30 बजे से होगी जो 13 नवंबर को रात 1.38 बजे तक रहेगी। आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार इस दिन राजमुद्रा-मसिपत्र-लेखनी की पूजा की जाती है।
विज्ञापन


भाई-बहन के हाथ का बनाया भोजन करे तो उससे भाई की आयु में वृद्धि ओर बहन के सौभाग्य की रक्षा होती है। आचार्य सुशांत राज के अनुसार सुबह 7.30 से 10.30 और फिर 12 बजे से 1.25 बजे तक भाई का तिलक करना शुभप्रद रहेगा। इस अवधि में शुभ की चौघड़िया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

भगवान विष्णु को लगेंगे 56 प्रकार के भोग

bhai dooj shubh muhurat.

12 नवंबर को गोवर्धन पूजा के दिन मंदिरों में भगवान विष्णु को 56 प्रकार के भोग लगाए जाएंगे। इस दिन गो-पूजन किया जाता है। अशोक और नीम के पत्ते रस्सी में बांधकर घर के मुख्य द्वार पर लगाए जाते हैं। माना जाता है कि इस द्वार से घर की ओर प्रवेश करने वाले नर-नारी, पशु आदि रोगी नहीं होते और वर्षभर प्रसन्न रहते हैं।

आदित्य पुराण के अनुसार यह पर्व कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। पंडित ज्ञानेंद्र पांडे के अनुसार भागवत के दशम स्कंध के 25वें अध्याय में गोवर्धन पूजा का वर्णन है। इस दिन अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं।

ऐसे हुआ पूजन शुरू
शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण ने अपनी बाल्यावस्था में ही इंद्र की पूजा निषिद्ध बताकर ग्वाल-बालों से गोवर्धन पूजन करवाया। स्वयं ही दूसरे स्वरूप से गोवर्धन बनकर अर्पण की हुई संपूर्ण भोजन सामग्री का भोग लगाया।

यह देखकर इंद्र ने प्रलय करने वाली वर्षा की, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को हाथ पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। तब से गोवर्धन पूजन होने लगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed