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Dehradun News: ‘ऋषियों की भांति हमें भी प्रकृति का करना होगा संरक्षण’
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भागवत कथा व्यास डॉ. सुंदर पराशर महाराज ने कहा कि ऋषियों की तरह हम सभी को प्रकृति का संरक्षण करना होगा। आज जिस रफ्तार से मनुष्य प्रकृति का दोहन कर रहा है। उसके कारण प्रकृति का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। हम वैदिक विधि को जीवन में अपनाकर प्रकृति का विनाश होने से रोक सकते हैं।
रविवार को स्वर्गपुरी आश्रम की ओर से रेसकोर्स मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास डॉ. सुंदर पराशर महाराज ने श्रद्धालुओं को ईश्वर और प्रकृति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने प्रकृति को मनुष्य के लिए रचा है, लेकिन मनुष्य अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए विनाश को आमंत्रित कर रहा है। वैदिक संस्कृति के माध्यम से हमारे ऋषियों ने हमें प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया है। मनुष्य या समाज यदि सुख की कामना रखता है तो उसे प्रकृति के संरक्षण के बारे में सोचना होगा। अंध विश्वास से देश और समाज का विकास संभव नहीं है। इस दौरान यशपाल टंडन, रमेश नरूला, श्याम सुंदर वाधवा, अंकित सचदेवा, राजीव आनंद, अमृतलाल सहगल मौजूद रहे।
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रविवार को स्वर्गपुरी आश्रम की ओर से रेसकोर्स मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास डॉ. सुंदर पराशर महाराज ने श्रद्धालुओं को ईश्वर और प्रकृति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने प्रकृति को मनुष्य के लिए रचा है, लेकिन मनुष्य अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए विनाश को आमंत्रित कर रहा है। वैदिक संस्कृति के माध्यम से हमारे ऋषियों ने हमें प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया है। मनुष्य या समाज यदि सुख की कामना रखता है तो उसे प्रकृति के संरक्षण के बारे में सोचना होगा। अंध विश्वास से देश और समाज का विकास संभव नहीं है। इस दौरान यशपाल टंडन, रमेश नरूला, श्याम सुंदर वाधवा, अंकित सचदेवा, राजीव आनंद, अमृतलाल सहगल मौजूद रहे।
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