मुखाग्नि से पहले बहने लगी चिता, डेढ़ किमी बाद मिली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहाड़ पर जीवन दुष्कर है यह तो हम और आप कई बार सुन, पढ़ और देख भी चुके हैं लेकिन पहाड़ों पर मुक्ति भी आसान नहीं है।
श्मशान घाट पर शव ने मलामियों (शवयात्रा में जाने वाले लोगों के लिए पहाड़ पर प्रचलित शब्द) को डेढ़ किलोमीटर दूर तक भगाया। यह बात सुनने में भले ही अजीब है मगर है सच...।
घटना ताड़ीखेत ब्लाक अंतर्गत आने वाले लमगढ़ी श्मशान घाट की है, जहां चिता को जलाने की तैयारी के दौरान तेज बारिश से उफनाए नाले में शव बह गया और करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जाकर बरामद हुआ। इसके बाद ही शव की अंत्येष्टि की जा सकी।
हार्टअटैक से मौत
ताड़ीखेत ब्लाक के अंतर्गत आने वाले पाली नदुली गांव के जीवन सिंह (78) की 12 जुलाई की रात हार्टअटैक से मौत हो गई थी।
13 जुलाई की सुबह उनकी शवयात्रा शुरू हुई। गांव से श्मशान घाट करीब 20 किलोमीटर दूर है। लकड़ियां जुटाकर जीवन सिंह की चिता तैयार की गई। उस समय वहां तेज बारिश हो रही थी।
सारे विधि-विधान के बाद जैसे ही चिता को मुखाग्नि की तैयारी की गई पास में बह रहा नाला उफन गया और शव चिता समेत नाले में बह गया।
शव पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी
नाले में पानी बढ़ता देख लोग पहले तो डर के मारे पीछे हट गए लेकिन जब शव थोड़ा ज्यादा ही आगे तक बह गया तो शवयात्रा में आए सभी लोगों ने शव को पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी।
करीब डेढ़ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद आखिर हिटोड़ी के पास शव पकड़ में आया। ग्रामीणों ने इसके बाद वहीं पर दोबारा चिता बनाई और दाह संस्कार कर दिया। कुछ देर बाद श्मशान घाट पर पूर्व विधायक करन माहरा भी पहुंचे।
घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने पूर्व विधायक से श्मशान घाट का जीर्णोद्धार कराने की मांग की। ग्रामीणों ने पूर्व विधायक को बताया कि चार गांवों के लोग इसी घाट पर शव दाह के लिए आते हैं, लेकिन बारिश के दौरान चिता को रोकने और बारिश से बचने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं हैं।