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B.C Khanduri: संसद में अलग राज्य गठन की मांग पर हुए थे मुखर, कहा था-सरकार मौन है, हम कब तक लाठी व गोली खाएंगे
Wed, 20 May 2026 08:15 AM IST
Renu Saklani
भूपेंद्र राणा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
भूपेंद्र राणा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Wed, 20 May 2026 08:15 AM IST
सार
संसद में अलग राज्य गठन की मांग पर बीसी खंडूड़ी मुखर हुए थे। उन्होंने संसद में कहा था, सरकार मौन है, हम कब तक लाठी व गोली खाते रहेंगे। तब अटल बिहारी वाजपेयी व लाल कृष्ण आडवाणी ने उनकी मांग का समर्थन किया था।
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मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सेना में देश की रक्षा के लिए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने बाद मेजर जनरल पद से सेवानिवृत्त बीसी खंडूड़ी 1991 में सक्रिय राजनीति में आए थे। पहली बार गढ़वाल संसदीय सीट से सांसद चुनने के बाद उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग के लिए संसद में मुखर हुए थे। उस समय उन्होंने संसद में कहा था, राज्य गठन पर सरकार मौन है।
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हम कब तक लाठी व गोली खाते रहेंगे। उनकी बात का अटल बिहारी वाजपेयी व लाल कृष्ण आडवाणी ने समर्थन किया था। 1994 में अलग राज्य की मांग को लेकर पहाड़ से मैदान तक आंदोलन चरम पर था। उस समय मेजर जनरल बीसी खंडूडी (सेनि.) बतौर सांसद गढ़वाल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इसके बाद 1998, 1999, 2004 व 2014 में भी इसी सीट से सांसद रहे। 1994 में केंद्र नरसिम्हा राव की सरकार थीं। जबकि भाजपा विपक्ष में थी।
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हर रोज गोली चल रही है और हर रोज अत्याचार हो रहे
सांसद रहते खंडूड़ी ने पृथक उत्तराखंड की मांग को लेकर संसद में सरकार के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई थी। उन्होंने संसद में कहा था कि उत्तराखंड राज्य बनाने की मांग लंबे समय चल रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था कि जानबूझ अलग राज्य की मांग को टाला जा रहा है। मुजफ्फनगर रामपुर तिराहा कांड सबको पता है, गर्भवती महिलाओं के पेट पर लात मारी गई। सरकार ये बताए कि हम कितनी लाठी व गोली खाएंगे, कितने लोग मारे जाएंगे। हर रोज गोली चल रही है और हर रोज अत्याचार हो रहे हैं।
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अब यह अत्याचार बर्दास्त नहीं होगा। संसद में बीसी खंडूड़ी के तल्ख तेवर दिख कर भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी व लाल कृष्ण आडवाणी ने भी उनकी बात का समर्थन करते हुए सरकार को घेरा था। राजनीति में आने के बाद खंडूड़ी की पर्वतीय राज्य के विकास व युवाओं को रोजगार के प्रति दूरदर्शी सोच रही है। वाजपेयी सरकार में सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री व दो बार राज्य मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पहाड़ के विकास को प्राथमिकता दी है।