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Uttarakhand: प्रदेश में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने की राह हुई आसान, नियामक आयोग ने किया नियम में संशोधन

Sat, 10 Jan 2026 08:19 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 10 Jan 2026 08:19 AM IST
सार

प्रदेश में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने की राह हुई आसान है। यूजेवीएनएल की आपत्तियों के बाद नियामक आयोग ने नियम में संशोधन  किया है। राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक समेत कई राज्यों के अध्ययन के बाद आयोग ने यह फैसला लिया।

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Battery energy storage systems installing path in Uttarakhand has become easier
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock Image

विस्तार

उत्तराखंड में अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) लगाने की राह आसान हो गई है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूजेवीएनएल के आपत्तियों व सुझाव के बाद पूर्व के नियमों में संशोधन कर दिया है। आयोग ने क्षमता आधारित टैरिफ को मंजूरी दे दी है।

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यूजेवीएनएल ने बीईएसएस के लिए प्रति यूनिट आधारित टैरिफ को अव्यावहारिक बताते हुए इसे क्षमता शुल्क (रुपये/मेगावाट/माह) के रूप में निर्धारित करने का अनुरोध किया था। यूजेवीएनएल ने आयोग को बताया कि देशभर में जारी अधिकांश स्टैंड अलोन बीईएसएस टेंडर क्षमता शुल्क मॉडल पर आधारित हैं। बीईएसएस एक पूंजी-प्रधान परिसंपत्ति है, जिसमें पूरा निवेश पहले किया जाता है। डेवलपर को मासिक ऋण भुगतान करना होता है, भले ही बैटरी से ऊर्जा का डिस्पैच हो या नहीं।

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क्षमता शुल्क मॉडल ही वर्तमान में प्रचलित
ऐसे में केवल प्रति यूनिट डिस्चार्ज पर आधारित भुगतान व्यवस्था से डेवलपर्स को अनिश्चित राजस्व का सामना करना पड़ता है, जिससे निवेश और केंद्र सरकार की वीजीएफ जैसी सहायता योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। नियामक आयोग ने देश में एनटीपीसी, एनएचपीसी, राजस्थान, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों की ओर से जारी बीईएसएस टेंडरों का अध्ययन करने के बाद पाया कि क्षमता शुल्क मॉडल ही वर्तमान में प्रचलित है।

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हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पहले से तय ट्रेडिंग मार्जिन में कोई बदलाव नहीं करेगा। यानी सोलर परियोजनाओं के लिए चार प्रतिशत ट्रेडिंग मार्जिन बीईएसएस के लिए पांच पैसे प्रति यूनिट ट्रेडिंग मार्जिन यथावत रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि आरई रेगुलेशन 2025 में निर्धारित 5.78 प्रति यूनिट की दर को अब क्षमता शुल्क के रूप में 3,96,747 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह के बराबर माना जाएगा। यह स्पष्टता आदेश की तिथि से लागू होगी।



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आगे के आदेशों तक प्रभावी रहेगी। माना जा रहा है कि इस संशोधन से प्रदेश में बीईएसएस प्रोजेक्ट में निवेश करने वालों का रुझान बढ़ेगा। बीईएसएस ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें दिन की सौर ऊर्जा को स्टोर करके पीक आवर में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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