देखिए, नियमों के विरूद्घ बैंक के बकाएदारों संग हो रहा कैसा सुलूक
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सरकार या बैंक के ऋण का भुगतान न करने वाले बकाएदारों को राजस्व बंदी गृह के बजाय जिला कारागार में अपराधियों के बीच रखा जा रहा है।
काफी समय से चल रही इस गैर कानूनी व्यवस्था पर शासन और जेल प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं। बकायेदारों को 10 से 12 दिन तक अपराधियों की तरह सजा काटनी पड़ रही है। बकायेदारों को किस अधिनियम के तहत कारागार में रखा जा रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
तहसील में उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार बैंक ऋण का भुगतान न करने पर देहरादून निवासी आनंद प्रकाश को 28 जुलाई से 14 दिन सुद्धोवाला स्थित जिला कारागार में रखा गया था। आनंद प्रकाश की तरह सदर तहसील के तहत आने वाले बकाएदारों को कारागार में ही रखा जाता है।
जबकि, राजस्व वसूली तय प्रक्रिया के तहत यह नियम विरुद्ध है। नियमों के अनुसार सरकारी योजनाओं के तहत यह बैंकों के ऋणों का भुगतान न करने वालों से वसूली का आदेश राजस्व विभाग से संबंधित तहसील को भेजा जाता है। संग्रह अमीन बकाएदारों से किश्तों में वसूली करते हैं। भुगतान न करने पर बकाएदार को पकड़ कर तहसील स्थित बंदीगृह में रखने का प्रावधान है, लेकिन सदर तहसील में अलग ही व्यवस्था चल रही है।
बंदीगृह में रखने के बजाय भेजा सुद्धोवाला जेल
यहां बकाएदारों को बंदीगृह में रखने के बजाय सीधे सुद्धोवाला जेल भेज दिया जाता है। हालांकि अन्य तहसीलों में यह व्यवस्था नहीं है। हैरत की बात यह है कि इस गैर कानूनी कार्रवाई के खिलाफ किसी ने आवाज नहीं उठाई। इस बाबत प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल किए गए तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि उत्तर प्रदेश वसूली संग्रह अधिनियम के तहत बकाएदारों की गिरफ्तारी की जाती है।
गैरकानूनी है व्यवस्था
वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव ने बताया कि उत्तर प्रदेश वसूली नियम संग्रह अधिनियम में बकाएदारों को कारागार में रखने की कोई व्यवस्था नहीं दी गई है। सिर्फ उन्हें बंदीगृह में ही रखा जा सकता है। प्रशासन की यह कार्रवाई पूरी तरह नियम विरुद्ध है।
बकाएदारों को राजस्व बंदीगृह में ही रखा जाता है। बंदीगृह में जगह न होने की स्थिति में ही उन्हें कारागार में भेजा जाता है। ऐसे में बकाएदारों को अन्य जगह भी निरुद्ध किया जा सकता है।
-रविनाथ रमन, जिलाधिकारी
बदहाल है बंदीगृह
तहसील में बना बंदीगृह की स्थिति बदहाल है। बंदीगृह के नाम पर एक अंधेरा कमरा है, जिसके शौचालय में दरवाजा तक नहीं। बदबू से भरे इस कमरे में कोई ठहर ही नहीं सकता। अधिकारियों का दावा है कि बंदीगृह की सुरक्षा के लिए होमगार्ड तैनात हैं, लेकिन होमगार्ड कहीं नजर नहीं आए। अधिकारी खुद मानते हैं कि बंदीगृह में दो घंटे से अधिक किसी बकाएदार को नहीं रखा जाता है। यदि अधिक दिन रखने की जरूरत होती है तो कारागार भेज दिया जाता है।