गुरुवार को मौसम ने फिर रोकी केदारनाथ यात्रा
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लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश के बाद गुरुवार को भी केदारनाथ से सोनप्रयाग तक यात्रा पड़ावों पर बारिश होती रही। जिस कारण केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा शुरू नहीं हो पाई। गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर सेवा भी गुरुवार सुबह तक बाधित रही। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने से रुद्रप्रयाग में अलकनंदा का जलस्तर 622.30 और मंदाकिनी का 621.60 मीटर बना हुआ है।
अब भी कई मोटर मार्ग बंद
बीते दिनों हुई बारिश से जनपद रुद्रप्रयाग में अब तक नौ मोटर मार्ग बंद पड़े हैं। लेकिन इन्हें खोलने के लिए पिछले दो दिन से लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई द्वारा प्रारंभिक स्तर पर भी प्रयास शुरू नहीं किए गए हैं। मार्गो के बंद होने से ग्रामीण मीलों पैदल रास्ता नाप रहे हैं। जरूरी वस्तुओं की सप्लाई में दिक्कत हो रही है।
तीन दिनों से हो रही बारिश के थमने के बाद गुरुवार को बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा सुचारू हो गई है। हालांकि बदरीनाथ हाईवे अभी भी लामबगड़ और बैनाकुली में अवरूद्ध पड़ा है। तीर्थयात्री पांडुकेश्वर से लामबगड़ तक वाहन से और लामबगड़ में 400 मीटर पैदल चलने के बाद पुन: जेपी कंपनी और लोकल वाहनों के जरिए दो किमी दूर बैनाकुली तक पहुंच रहे हैं।
पुन: यहां से करीब 500 मीटर पैदल चलने के बाद फिर वाहन से 12 किमी दूर बदरीनाथ पहुंच रहे हैं। गृरुवार को सुबह आठ बजे बदरीनाथ में दर्शन कर 17 वाहनों में 283 तीर्थयात्री अपने घरों के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। बदरीनाथ धाम में दो दिनों से 1500 तीर्थयात्री फंसे हुए थे।
फिलहाल, हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा भी सुचारू है। गुरुवार की सुबह छह बजे 200 तीर्थयात्री गोविंदघाट से घांघरिया के लिए रवाना हो गए। यात्रा मार्ग पर मौसम सुहावना बना हुआ है।
इसस पहले खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के चलते 30 तक रोकी गई केदारनाथ की पैदल यात्रा बुधवार को भी नहीं चल पाई। सोनप्रयाग से चलकर गौरीकुंड पहुंचे दो सौ यात्री मौसम और रास्ता ठीक होने का इंतजार करते रहे। गौरीकुंड से जंगलचट्टी के बीच चीरबासा के पास पैदल रास्ता 20 मीटर क्षतिग्रस्त हो गया।
बुधवार को बदरीनाथ की यात्रा का भी यही हाल रहा। चमोली जिले में भारी बारिश और बदरीनाथ हाईवे बंद होने के चलते प्रशासन ने दूसरे दिन भी पड़ावों और धाम में यात्रियों को रोके रखा। हालांकि, बारिश बुधवार शाम चार बजे थम गई। लेकिन हाईवे लामबगड़, बल्दौड़ा और बैनाकुली में बंद रहा।
1436 यात्री जोशीमठ, पीपलकोटी, गोविंदघाट बाजार और पांडुकेश्वर में रुके। बदरीनाथ धाम में 1500 तीर्थयात्री हाईवे खुलने का इंतजार करते रहे। ये यात्री मंगलवार से ही फंसे थे। मंगलवार रात भारी बारिश से हाईवे पागलनाला और पाताल गंगा में भी बंद हो गया था। दोनों जगह बुधवार को दिन में 3.30 बजे मार्ग खुल गया। इसके बाद यहां फंसे बदरीनाथ और हेमकुंड जाने वाले 243 तीर्थयात्री जोशीमठ पहुंचे। मंगलवार को भी बदरीनाथ की यात्रा नहीं चल पाई थी।
बारिश ने रोकी केदारनाथ की हेली सेवाएं
केदारनाथ की यात्रा 25 जून से ही बंद है। रुक-रुककर हो रही बारिश के चलते बुधवार को भी बाबा केदार के भक्तों को मायूस होना पड़ा। बुधवार को सोनप्रयाग में सौ से अधिक श्रद्धालु बारिश में भीगते हुए छह घंटे तक यात्रा शुरू होने का इंतजार करते रहे। यात्रियों की पुलिस और अन्य कर्मचारियों से बहस भी हुई।
बताया गया कि गौरीकुंड से जंगलचट्टी के बीच चीरबासा के निकट पैदल रास्ता लगभग 20 मीटर क्षतिग्रस्त हो गया है। यहां बिजली के तीन खंभे भी उखड़ गए हैं। ऐसे में जिलाधिकारी राघव लंगर ने केदारनाथ की पैदल यात्रा रोकने के निर्देश दिए। दोपहर बाद मौसम ठीक होने पर दो सौ यात्रियों को सोनप्रयाग से गौरीकुंड जाने की अनुमति दी गई।
गुरुवार को ये यात्री बारिश के कारण यहीं से पैदल केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए रवाना नहीं हो सके। बुधवार को तेज बारिश के कारण गुप्तकाशी से केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी बाधित होती रही। हालांकि दिन भर में 275 श्रद्धालुओं ने हेलीकाप्टर से धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन किए।
बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब में हिमपात, ठंड बढ़ी
बुधवार को भारी बारिश के बीच बदरीनाथ की ऊंची चोटियों के साथ ही हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, गोरसों बुग्याल, नंदा घुंघटी सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी हुई। बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब धामों में ठंड बढ़ गई है।
खराब मौसम और गौरीकुंड-केदारनाथ के बीच पैदल रास्ते में कुछ दिक्कत आने से पैदल यात्रा शुरू नहीं की गई। बुधवार दोपहर बाद सोनप्रयाग से दो सौ यात्री गौरीकुंड के लिए रवाना किए गए हैं जो बृहस्पतिवार को केदारनाथ की पैदल यात्रा पर जाएंगे।
-डॉ. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
मां पूर्णागिरि के दर्शन पर रात में रोक
टनकपुर (चंपावत)। बरसात में आपदा के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने मां श्री पूर्णागिरि धाम में रात के वक्त दर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है। रात आठ बजे से सुबह पांच बजे तक श्रद्धालु काली मंदिर से ऊपर नहीं जा सकेंगे। पुलिस के साथ ही मंदिर समिति को भी इस बाबत निर्देशित किया गया है।
पूर्णागिरि धाम की यात्रा बरसात में जोखिम भरी हो जाती है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि फिलहाल भैरव मंदिर तक मोटर मार्ग और मुख्य मंदिर तक पैदल मार्ग खोला गया है लेकिन बरसात में भूस्खलन और मलबा आने का खतरा है, जिसे देखते हुए रात के वक्त दर्शन पर रोक लगाई गई है।