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बदरीनाथ हाईवे: कमेड़ा वन में राहत, कमेड़ा टू और उमट्टा बनेगा आफत, 35 किमी में सात से अधिक भूस्खलन क्षेत्र

Sun, 05 Apr 2026 04:09 PM IST
Alka Tyagi लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी, संवाद न्यूज एजेंसी, कर्णप्रयाग (चमोली)
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी, संवाद न्यूज एजेंसी, कर्णप्रयाग (चमोली) Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 05 Apr 2026 04:09 PM IST
सार

Chardham Yatra 2026: गौचर के समीप कमेड़ा वन भूस्खलन जोन में एनएचआईडीसीएल ने सुरक्षा कार्य किए हैं, हालांकि इसकी वास्तविक परीक्षा बारिश के दौरान होगी। फिलहाल वर्षा न होने से कुछ राहत है।

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Badrinath Highway Relief in Kameda Forest; Kameda-2 and Umatta Set to Pose a Threat
बदरीनाथ हाईवे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

चारधाम यात्रा शुरू होने में महज दो सप्ताह शेष हैं, लेकिन कमेड़ा से सोनला तक सात से अधिक भूस्खलन प्रभावित जोन, चमोली जिले के प्रवेश द्वार गौचर के पास कमेड़ा वन क्षेत्र, कर्णप्रयाग, उमट्टा धार, जयकंडी, जिलासू पुल, लंगासू से देवलीबगड़ और बेडाणू कस्बे जैसे कई संवेदनशील स्थान प्रशासन और श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बने हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) द्वारा कई स्थानों पर सुरक्षा और ट्रीटमेंट कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन यात्रा शुरू होने तक इनके पूर्ण होने पर संदेह बना हुआ है।

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गौचर के समीप कमेड़ा वन भूस्खलन जोन में एनएचआईडीसीएल ने सुरक्षा कार्य किए हैं, हालांकि इसकी वास्तविक परीक्षा बारिश के दौरान होगी। फिलहाल वर्षा न होने से कुछ राहत है। वहीं कमेड़ा पेट्रोल पंप से कूड़ा निस्तारण केंद्र तक का कमेड़ा टू भूस्खलन जोन अभी भी गंभीर चुनौती बना हुआ है, जहां तेजी से कार्य जारी है, लेकिन समय पर पूरा होना संदिग्ध है। कार्य अधूरा रहने पर यहां वाहनों को संकरे और ऊबड़-खाबड़ मार्ग से गुजरना पड़ सकता है।
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गौचर से कर्णप्रयाग के बीच भी कई स्थान संवेदनशील बने हुए हैं, हालांकि बारिश नहीं होने की स्थिति में राहत मिल सकती है। चटवापीपल में पुल का निर्माण पूरा हो चुका है और यात्रा से पहले इसके शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा चटवापीपल पेट्रोल पंप के पास स्थित भूस्खलन जोन पर ट्रीटमेंट कार्य पूरा किया जा चुका है, जिसकी भी परीक्षा आगामी बारिश में होगी।
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कर्णप्रयाग क्षेत्र में राजनगर, उमा माहेश्वर आश्रम, उमट्टा धार, जयकंडी और जिलासू पुल के पास भूस्खलन संभावित क्षेत्र बने हुए हैं। कई स्थानों पर हाईवे पर लगातार पत्थर गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। विशेष रूप से उमट्टा क्षेत्र, जहां बीते वर्ष भारी भूस्खलन हुआ था, वहां अब तक स्थायी ट्रीटमेंट नहीं हो पाया है। एनएचआईडीसीएल द्वारा मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन करीब 150 मीटर से अधिक ऊंचाई और बड़े क्षेत्र में फैले भूस्खलन के कारण खतरा बरकरार है। यहां मौजूद कई पेड़ भी जोखिम को बढ़ा रहे हैं।

लंगासू से देवलीबगड़ के बीच पांच से अधिक स्थानों पर भूस्खलन प्रभावित जोन बने हुए हैं। बेडाणू कस्बे के दोनों ओर भारी भूस्खलन की स्थिति है, जबकि विराजकुंज से आगे लगातार पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने यात्रा से पहले सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने की मांग की है। बिराजकुंज के व्यापारी देवी प्रसाद पंत और लंगासू के टीका प्रसाद सहित अन्य लोगों का कहना है कि यात्रा शुरू होने से पूर्व भूस्खलन का मलबा हटाकर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।

प्रतीक्षालयों पर पसरी है गदंगी
चारधाम यात्रा मार्ग पर गौचर से देवलीबगड़ तक कई जगह एनएचआईडीसीएल ने प्रतीक्षालय बनाए हैं। करीब दस से अधिक प्रतीक्षालय यहां यात्रियों के लिए अल्प विश्राम के लिए हैं। लेकिन इन प्रतीक्षालयों पर गदंगी पसरी है।

गौचर और कर्णप्रयाग में स्वास्थ्य जांच सेंटर
चारधाम यात्रा के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से गौचर और कर्णप्रयाग में यात्रियों के लिए हर वर्ष की भांति स्वास्थ्य जांच सेंटर बनाए जाएंगे। जबकि लंगासू में भी स्वास्थ्य परामर्श सेंटर बनेगा।

गौचर, कर्णप्रयाग में पार्किंग की कमी, लंगासू में पार्किंग नहीं
चारधाम यात्रा में गौचर और कर्णप्रयाग दो नगर पालिकाएं हैं। लेकिन यहां पार्किंग की कमी बनी है। जबकि यात्रा मार्ग पर कर्णप्रयाग के बाद लंगासू बड़ा कस्बा है यहां कई होटल हैं। लेकिन यहां पार्किंग नहीं है। वहीं कर्णप्रयाग में उमा देवी चौक से राजनगर तक हाईवे का चौड़ीकरण नहीं हो पाया। ऐसे में यहां जाम की समसय बनती है।

चारधाम यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। साथ ही निर्माणाधीन कार्यों को जल्द पूरा करने के कहा गया है। जल्द ही तैयारियों को लेकर एक बैठक होगी। यात्रा से पहले सभी व्यवस्थाएं ठीक कर ली जाएगी।
-सोहन सिंह रांगड़, एसडीएम कर्णप्रयाग

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