फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Baba Ramdev become twenty two year of abandonment

आज के दिन बाबा रामदेव ने ली थी संन्यास की दीक्षा, 22 वर्ष के ‘गबरू’

Wed, 05 Apr 2017 05:33 PM IST
कौशल सिखौला/ अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 05 Apr 2017 05:33 PM IST
विज्ञापन
Baba Ramdev become twenty two year of abandonment

योग गुरु बाबा रामदेव रामनवमी पर 22 वर्ष के ‘गबरू’ हो जाएंगे। 1995 में रामनवमी के दिन ही बाबा रामदेव को हरिद्वार में संन्यास की दीक्षा दी गई थी। चूंकि संन्यासी की आयु उसके संन्यास की तिथि से ही मानी जाती है, अत: बाबा स्वयं अपनी आयु संन्यास के दिन से ही गिनते हैं।

विज्ञापन


उनका 22वां संन्यास दिवस बुधवार को उनके जन्मदिन के रूप में योग परिवार के श्रद्धालुओं के बीच मनाया जाएगा। दो दशकों में ही बाबा ने समूचे विश्व में योग और आयुर्वेद में तो क्रांति की है, उसकी दूसरी मिसाल नहीं।

विज्ञापन

हरियाणा में जन्में लेकिन भाग्य ‌हरिद्वार से जुड़ा

Baba Ramdev become twenty two year of abandonment
बाबा रामदेव

बाबा रामदेव रामकिशन के रूप में जन्मे तो हरियाणा में, पर उनके भाग्य में हरिद्वार लिखा हुआ था। जब वे घर छोड़कर ज्ञान प्राप्ति के लिए हिमालय गए तो वहीं उन्हें नेपाल मूल के आचार्य बालकृष्ण मिल गए। दोनों वर्ष 1993 में हरिद्वार आए तथा कनखल के बड़े अखाड़े में शरण ली।

अपनी योग विद्या से रामदेव ने संतों को कुछ ऐसा प्रभावित किया कि गंगा किनारे बसे कृपालु बाग आश्रम के स्वामी शंकरदेव ने उन्हें अपने आश्रम में बुला लिया। संन्यास के प्रति गहरी रुचि और कई विषयों पर बाबा का ज्ञान देखकर गुरु शंकरदेव आश्चर्यचकित रह गए।

विदेशी सांसदों को योग सिखाने वाले रामदेव

Baba Ramdev become twenty two year of abandonment
बाबा रामदेव - फोटो : अमर उजाला

1995 की रामनवमी पर भगवा वस्त्र धारण करने के बाद बाबा रामदेव ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर उन्होंने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में ऐसी अलख जगाई कि योग विश्व दिवस के आसन पर जा बैठा। वहीं, दुनिया के 140 देशों में भारत के आयुर्वेद की तूती बोलने लगी।

संयुक्त राष्ट्र संघ सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने बाबा को अपने यहां आमंत्रित कर योग के गुर सीखे। विदेशी सांसदों को योग सिखाने वाले रामदेव भारत के पहले संत बन गए हैं।

इस बार बाबा का जन्मदिन यज्ञ के साथ बुधवार को सादगीपूर्वक मनाया जाएगा।  एक सफल योगी के रूप में बाबा ने भारत के अन्य योगाचार्यों को  काफी पीछे छोड़ दिया है। भारत के प्राचीन आयुर्वेद को उन्होंने विश्व की कई भाषाओं में प्रकाशित करवाया। विश्वभर की जड़ी बूटियों पर जितना बड़ा काम आज पतंजलि योगपीठ में चल रहा है, उतना शायद पूरे देश में एक साथ चला हो। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed