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उत्तराखंड में बीएड मान्यता पर लगातार दूसरे साल रोक

Fri, 18 Mar 2016 08:24 AM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Mar 2016 08:24 AM IST
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B. Ed. college Recognition in uttarakhand.
प्रदेश में बीएड के सौ से ऊपर कॉलेज हैं। - फोटो : Demo pic

प्रदेश में लगातार दूसरे साल न तो कोई बीएड, डीएलएड, बीपीएड का कॉलेज खुलेगा और न ही किसी पुराने कॉलेज की सीट में बढ़ोतरी हो पाएगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए साफ कर दिया है कि इन तीनों कोर्सेज में कोई मान्यता नहीं दी जाएगी। यह लगातार दूसरा साल है, जबकि प्रदेश में नए कॉलेज या सीट में बढ़ोतरी नहीं होगी।

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एनसीटीई ने हाल ही में नए सत्र की मान्यता और सीट बढ़ोतरी के लिए आवेदन मांगे हैं। नोटिफिकेशन में साफ किया गया है कि प्रदेश में इस बार भी बीएड, डीएलएड या बीपीएड के लिए ना कोई नई मान्यता का आवेदन किया जा सकेगा और ना ही किसी पुराने कॉलेज में सीट बढ़ेगी।
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गत वर्र्ष एनसीटीई ने नोटिफिकेशन में उत्तराखंड के लिए आवेदन तो मांगे थे, लेकिन बाद में राज्य सरकार की ओर से भेजे गए पत्र की वजह से किसी भी कॉलेज की फाइल आगे नहीं बढ़ पाई थी। गत वर्ष किसी भी बीएड या बीपीएड कॉलेज को मान्यता नहीं मिली थी।
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युवाओं को करना होगा दूसरे राज्यों का रुख
इस साल सरकार के पत्र के क्रम में एनसीटीई ने पहले ही साफ कर दिया है कि बीएड, बीपीएड या डीएलएड में नई मान्यता और सीट बढ़ोतरी का आवेदन नहीं लिया जाएगा। प्रदेश में इस समय गढ़वाल विवि, कुमाऊं विवि और श्रीदेव सुमन विवि के कुल बीएड कॉलेजों की संख्या तो 100 से ऊपर है, लेकिन बीपीएड के केवल चार कॉलेज ही हैं। जबकि, डीएलएड का कोर्स सरकार अपने स्तर पर चला रही है।

ऐसे में यहां के हजारों युवाओं को इस साल भी बीपीएड और डीएलएड के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना होगा। गौरतलब है कि इससे पहले भी एक बार वर्ष 2012 में सरकार के पत्र जाने के बाद एनसीटीई ने किसी भी नए कॉलेज को मान्यता नहीं दी थी।


इनका है कहना
राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में एनसीटीई को पत्र भेजा गया था। उसी क्रम में एनसीटीई ने मान्यता पर रोक लगाई है। सवाल यह है कि प्रदेश में सरकारी डीएलएड कोर्स को मान्यता नहीं है। ऐसे में प्रदेश के युवा कहां जाएंगे। यह सरकार की गलत सोच का प्रतीक है, जो युवाओं के लिए घातक है। इससे प्रदेश से पलायन को बढ़ावा मिलेगा। 
-सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट

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