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आयुष चिकित्सकों की नौकरी पर लटकी तलवार, सीएमओ को भेजा चेतावनी भरा पत्र
कीर्तिराज रुमाल, अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Wed, 25 Apr 2018 11:26 AM IST
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मरीजों की ओपीडी में लापरवाही आयुष चिकित्सकों को महंगी पड़ सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने राज्य के 11 जिलों में आयुष चिकित्सकों की ओपीडी को संतोषजनक नहीं माना है।
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निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने ओपीडी में सुधार न होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आयुष चिकित्सकों की संविदा सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। इस चेतावनी से आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सकों के साथ ही एनएचएम कर्मियों में खलबली मची है।
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आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इलाज के लिए उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संविदा पर 68 आयुष चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन अप्रैल 2017 से लेकर फरवरी 2018 तक हुए सर्वे में आयुष चिकित्सकों की ओर से ओपीडी में कम रोगी देखे जाने का खुलासा हुआ है। इसे प्रथमदृष्टया आयुष चिकित्सकों की ड्यूटी के प्रति उदासीनता और लापरवाही माना गया है। इससे एनएचएम के तहत चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं।
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ऊधमसिंह नगर जिले में भी 13 आयुष चिकित्सकों की तैनाती के बावजूद ओपीडी संतोषजनक नहीं मिली है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. अंजलि नौटियाल ने बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जिले को छोड़कर राज्य के 11 जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को चेतावनी पत्र लिखकर गंभीर नाराजगी जताई है। पत्र में कहा गया है कि 11 जिलों में किसी भी आयुष चिकित्सक की ओपीडी संतोषजनक नहीं है, यदि भविष्य में भी वह अपनी ड्यूटी में सुधार नहीं लाते हैं, तो उनकी संविदा सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।
अधिकतर मरीज एलोपैथिक इलाज को ही प्राथमिकता देते हैं। इस कारण आयुष चिकित्सकों की ओपीडी अधिक नहीं हो पा रही है। इसके बावजूद उन्हें ओपीडी बढ़ाने के लिए निर्देषित किया जा रहा है।
- एसके शाह, सीएमओ, ऊधम सिंह नगर