फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   army projects on china border.

भारत-चीन सीमा प्रोजेक्ट्स पर जागी उत्तराखंड सरकार

Thu, 05 Mar 2015 02:29 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 05 Mar 2015 02:29 AM IST
विज्ञापन
army projects on china border.

उत्तराखंड में भूमि एवं वन पर्यावरण के अड़ंगों के चलते अटकी पड़ी चीन सीमा से लगती सामरिक महत्व की सैन्य परियोजनाओं के निस्तारण में अब तेजी आने की उम्मीद है।

विज्ञापन


सेना के भूमि संबंधित एक दर्जन से अधिक प्रकरण प्रदेश में लटके हैं। इनके निस्तारण के लिए मुख्य सचिव ने सब एरिया मुख्यालय को पत्र लिखकर इनके शीघ्र निस्तारण की पहल की है।
विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि करीब ढाई साल पहले तत्कालीन मध्य कमान प्रमुख और मुख्यमंत्री के बीच हुई सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस (सीएमएलसी) में सेना के रखे अधिकांश प्रकरण लंबित हैं। मुख्य सचिव ने सेना से भूमि एवं अन्य प्रकरणों में अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे सैन्य विस्तारीकरण के आड़े आ रही भूमि एवं वन पर्यावरण की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। उधर, सेना भी एक बार फिर सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस कर लंबित मसलों पर मुख्यमंत्री और मध्य कमान प्रमुख के बीच वार्ता की तैयारी कर रही है।

सेना के डेढ़ दर्जन प्रस्ताव हैं लटके

army projects on china border.

माना जा रहा है कि जल्द लंबित मामलों पर सेना और सरकार के बीच वार्ता हो सकती है। बता दें कि उत्तरकाशी और चमोली जनपद में वन पर्यावरण की अनापत्ति नहीं मिलने से सेना की स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड सहित कुछ अहम योजनाएं लटकी हुई हैं।

5 नवंबर 2012 को सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस (सीएमएलसी) में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और मध्य कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत के बीच बैठक हुई थी। सेना ने उत्तराखंड में सेना का मौजूदा ढांचा तैयार करने के लिए भूमि की आवश्यकता के डेढ़ दर्जन प्रस्ताव दिए थे, जिनमें से वन पर्यावरण की आपत्तियों के चलते कई मामले लटके हैं।

भूमि संबंधित लंबित सामरिक योजनाएं
- सेना को खनन और स्टोन क्रशर के लिए लाइसेंस
- 2005 से बनबसा (चंपावत) और कौसानी (अल्मोड़ा) में रुका वन भूमि का हस्तांतरण
- आर्टिलरी और फील्ड फायरिंग रेंज के लिए नंदा देवी व गंगोत्री क्षेत्र में भूमि
- सैन्य पड़ाव भूमि को राज्य सरकार को सौंप बदले में अन्यत्र भूमि
- पंतनगर और नैनीसैंणी में यूएवी बेस निर्माण के लिए 100 एकड़ भूमि की जरूरत
- देहरादून, रायवाला और जोशीमठ में वन क्षेत्र में भूमि की जरूरत

इन योजनाओं पर हुई प्रगति

army projects on china border.

- आईएमए के सामने अंडरपास बनाने की योजना को मंजूरी
- धरासू- सानेल बार्डर रोड को बीआरओ को सौंपा
- सैनिक और पूर्व सैनिकों को हाउस टैक्स में रियायत दी गई
- आईएमए के लिए 3.9 एकड़ भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव प्रक्रियाधीन

क्या है सीएमएलसी
सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस (सीएमएलसी) सेना की प्रत्येक कमान के स्तर पर हर वर्ष होती है। कमान के ऑपरेशनल क्षेत्र जिन राज्यों में आते हैं, उनके मुख्यमंत्रियों के साथ जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ (जीओसी इन सी) की वार्षिक बैठक होती है।

हिमाचल, पंजाब, हरियाणा में पश्चिम कमान के जीओसी इन सी की नियमित वार्षिक कांफ्रेंस होती है। मध्य कमान के तहत आने वाले राज्य में उत्तराखंड इस मामले में सबसे फिसड्डी है। सात बरस बाद वर्ष 2012 में सीएमएलसी हुई।

सेना की कोशिशों के बाद मुख्यमंत्री से समय नहीं मिलने के कारण सीएमएलसी आयोजित नहीं हो पाती हैं। इस बैठक में सेना के राज्य सरकार से संबंधित मामलों पर दोनों पक्ष प्रगति की समीक्षा करने के साथ उनके जल्द निस्तारण को सुनिश्चित करवाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed