फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   army man family story of kargil war

पिता 71 की लड़ाई में, बेटा कारगिल में शहीद

Sat, 26 Jul 2014 04:57 PM IST
अमर उजाला, पिथौरागढ़
अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 26 Jul 2014 04:57 PM IST
विज्ञापन
army man family story of kargil war

कारगिल शहीद जवाहर सिंह धामी के परिवार ने इस देश की रक्षा में बलिदान दिया था। ऐसे उदाहरण बहुत कम होंगे एक परिवार की दो पीढ़ियां देश के लिए शहादत दे चुकी हों और एक पीढ़ी ने द्वितीय विश्वयुद्ध में भागीदारी की।

विज्ञापन


पिथौरागढ़ जिले के मूनाकोट विकासखंड के अंतर्गत मड़मानले के पास अखुली गांव के इस परिवार की गाथा स्वर्णाक्षरों में लिखने लायक है। इस परिवार की तीन पीढ़ियों ने देश की रक्षा के लिए सेवा की थी।
विज्ञापन


कारगिल में जवाहर सिंह धामी की शहादत के बाद इस परिवार की अगली पीढ़ी अखुली गांव छोड़ चुकी है।

1991 में सेना में भर्ती हुए

जवाहर सिंह धामी 26 मई 1999 को कारगिल सेक्टर में दुश्मन के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। वह 25 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। उनकी टुकड़ी गश्त पर थी। तभी दुश्मन के साथ भिड़ंत हो गई। दुश्मन के आठ सैनिक मारे गए। शहीद जवाहर सिंह को कई गोलियां लगी थीं। जवाहर सिंह 1991 में सेना में भर्ती हुए थे। उसी साल उनका विवाह लीला देवी से हो गया। उनकी एक पुत्री है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दादा दान सिंह धामी भी भारतीय सेना में थे
जवाहर सिंह के दादा दान सिंह धामी भी भारतीय सेना में थे। दूसरे विश्व युद्ध के समय 1942 की लड़ाई में भाग लेने के बाद जब वह रिटायर होकर घर आए तो उनका बीमारी से निधन हो गया। उनके बाद जवाहर के पिता कमान सिंह धामी ने भी भारतीय सेना ज्वाइन कर ली।

1971 में भारत-पाक युद्ध के समय जम्मू-कश्मीर में कमान सिंह धामी शहीद हो गए। तब जवाहर सिंह की उम्र मात्र एक साल की थी। माता झूपा देवी ने धैर्य नहीं छोड़ा। उन्होंने बेटे को जवाहर सिंह को बंदा प्राथमिक स्कूल से प्राइमरी तक की शिक्षा दिलवाई। हाईस्कूल की शिक्षा के लिए वह राजकीय इंटर कॉलेज मड़मानले आ गए।


हाईस्कूल की शिक्षा प्राप्त करते ही वह सेना में भर्ती हो गए, लेकिन झूपा देवी को बेटे का यह सुख भी ज्यादा समय तक नहीं मिल पाया। पहले ससुर की आकस्मिक मौत, फिर पति और बेटे की शहादत से झूपा देवी बुरी तरह टूट गई। अब वह बहू लीला देवी और नातिन के साथ रहती हैं। परिवार को पेंशन मिलती है। पिथौरागढ़ के बस्ते गांव में उन्होंने मकान बना लिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed