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Dehradun News: त्यूणी के सेब बागवानों को बारिश या ओलावृष्टि का इंतजार
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Iसेब के पेड़ तौलिए बनाने में आ रही दिक्कतI
देहरादून जिले के सीमांत क्षेत्र त्यूणी के सेब बागवान बड़ी बेसब्री के साथ बारिश या ओलावृष्टि का इंतजार कर रहे हैं। लंबे समय से बारिश न होने चलते भूमि काफी सख्त हो गई है। ऐसे में बागवानों को सेब के पेड़ के तौलिए बनाने में दिक्कत आ रही है। बागवानों को कहना है कि अगर जल्द बारिश या ओलावृष्टि न हुई तो सेब के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
जौनसार बावर की सीमाएं हिमाचल प्रदेश से लगती है। हिमाचल प्रदेश में दशकों से सेब की बागवानी हो रही है। त्यूणी तहसील क्षेत्र में भी सेब की बागवानी की जाती है। दिसंबर माह में सेब के पेड़ के तौलिए बनाए जाते हैं। जिसमें सेब के पेड़ के चारों ओर खोदाई कर उसमें गोबर और खाद डाली जाती है। लेकिन बारिश न होने के कारण बगीचों की भूमि सूख गई है।
सूखी और सख्त भूमि पर खोदाई करने में बागवानों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम कैराड़ के बागवान लछम सिंह, रजनीश, पवन, हुकम सिंह, मनीष आदि ने बताया कि बारिश नहीं हो रही है। वहीं सेब के पेड़ों के तौलिए बनाने का समय निकलता जा रहा है। कहा कि बारिश बहुत जरूरी है।
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वहीं मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि 15 दिसंबर के बाद ही सर्दियों का मौसम शुरू होता है। सीजन शुरू होने के बाद ही बारिश या ओलावृष्टि का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
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देहरादून जिले के सीमांत क्षेत्र त्यूणी के सेब बागवान बड़ी बेसब्री के साथ बारिश या ओलावृष्टि का इंतजार कर रहे हैं। लंबे समय से बारिश न होने चलते भूमि काफी सख्त हो गई है। ऐसे में बागवानों को सेब के पेड़ के तौलिए बनाने में दिक्कत आ रही है। बागवानों को कहना है कि अगर जल्द बारिश या ओलावृष्टि न हुई तो सेब के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
जौनसार बावर की सीमाएं हिमाचल प्रदेश से लगती है। हिमाचल प्रदेश में दशकों से सेब की बागवानी हो रही है। त्यूणी तहसील क्षेत्र में भी सेब की बागवानी की जाती है। दिसंबर माह में सेब के पेड़ के तौलिए बनाए जाते हैं। जिसमें सेब के पेड़ के चारों ओर खोदाई कर उसमें गोबर और खाद डाली जाती है। लेकिन बारिश न होने के कारण बगीचों की भूमि सूख गई है।
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सूखी और सख्त भूमि पर खोदाई करने में बागवानों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम कैराड़ के बागवान लछम सिंह, रजनीश, पवन, हुकम सिंह, मनीष आदि ने बताया कि बारिश नहीं हो रही है। वहीं सेब के पेड़ों के तौलिए बनाने का समय निकलता जा रहा है। कहा कि बारिश बहुत जरूरी है।
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वहीं मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि 15 दिसंबर के बाद ही सर्दियों का मौसम शुरू होता है। सीजन शुरू होने के बाद ही बारिश या ओलावृष्टि का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।