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उत्तराखंड में अब तक नहीं बनी नशा विरोधी नीति
Thu, 27 Dec 2018 11:01 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 27 Dec 2018 11:01 AM IST
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- फोटो : YouTube
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पंजाब की तरह प्रदेश में पैर पसार चुके नशे के कारोबार पर लगाम कसने को राज्य सरकार अभी तक नशा विरोधी नीति (एंटी ड्रग्स पॉलिसी) तैयार नहीं कर पाई है।
चंडीगढ़ में तीन माह पहले मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद शासन स्तर पर नीति बनाने को लेकर मंथन भी हुआ। इसी दौरान देहरादून और हल्द्वानी में सरकारी स्तर पर नशा मुक्ति केंद्र खोलने पर सहमति हुई, लेकिन कार्ययोजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। अधिकारियों का मानना है कि किसी तरह की गाइड लाइन न होने के कारण जगह-जगह खुल गए नशा मुक्ति केंद्रों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है।
पंजाब के बाद उत्तराखंड राज्य नशे के कारोबार से सबसे ज्यादा प्रभावित है। पांच साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हालात बेहद भयावह है। इस अवधि में प्रदेश पुलिस ने 74.82 करोड़ की स्मैक, हीरोइन, कोकीन, ड्रग पेपर, अफीम और चरस बरामद की है। यह तो वह हिस्सा है, जिसे पुलिस पकड़ पाई कितनी नशा बिका, कितना धुएं में उड़ा और कितना हलक में उतर गया, इसका तो कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। यूं तो सरकार लंबे समय से नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर चिंता दर्शा रही है, लेकिन नशा विरोधी नीति तैयार करने में उतनी गंभीरता नहीं दिखा पाई है।
2017 में देहरादून की तत्कालीन एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने निजी नशा मुक्ति केंद्रों पर सवाल उठाते हुए सरकारी स्तर पर ऐसे केंद्र खोलने की वकालत की थी। पुलिस मुख्यालय के माध्यम से सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। इसी कड़ी में तीन माह पहले नशीले पदार्थों को लेकर चंडीगढ़ में में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्रदेश के सीएम त्रिवेंद्र रावत, प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी शामिल हुए थे। इस बैठक में पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के साथ नशा विरोधी नीति के अलावा नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर जारी गाइड लाइन को लेकर चर्चा की थी।
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चंडीगढ़ से लौटने के बाद मुख्य सचिव उत्पल कुमार इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ एक बैठक भी कर चुके हैं। बैठक में देहरादून और हल्द्वानी में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र खोलने पर सहमति हुई थी, लेकिन पूरी कार्ययोजना परवान नहीं चढ़ सकी है। राजपुर स्थित जागृति फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र से 43 रोगियों की फरारी की घटना के बाद बुधवार को पुलिस महकमे में नशा मुक्ति केंद्रों की अव्यवस्थाओं का मुद्दा छाया रहा।
ड्रग्स कारोबार पर लगाम कसने के लिए एंटी ड्रग्स नीति जरूरी है। इसी कारण नशा मुक्ति केंद्राें के संचालन को लेकर किसी तरह की गाइड लाइन नहीं है। शासन स्तर पर पहले देहरादून और हल्द्वानी में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र खोलने पर चर्चा हो चुकी है।
- अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था
ड्रग्स कारोबार रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। उत्तर भारतीय राज्य आपस में मिलकर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। इसके लिए चंडीगढ़ में बने नोडल कार्यालय से प्रदेश को जोड़ा जा रहा है। ठोस नीति तैयार कर इसपर पूरी तरह से रोकथाम की जाएगी।
- उत्पल कुमार, मुख्य सचिव
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चंडीगढ़ में तीन माह पहले मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद शासन स्तर पर नीति बनाने को लेकर मंथन भी हुआ। इसी दौरान देहरादून और हल्द्वानी में सरकारी स्तर पर नशा मुक्ति केंद्र खोलने पर सहमति हुई, लेकिन कार्ययोजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। अधिकारियों का मानना है कि किसी तरह की गाइड लाइन न होने के कारण जगह-जगह खुल गए नशा मुक्ति केंद्रों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है।
पंजाब के बाद उत्तराखंड राज्य नशे के कारोबार से सबसे ज्यादा प्रभावित है। पांच साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हालात बेहद भयावह है। इस अवधि में प्रदेश पुलिस ने 74.82 करोड़ की स्मैक, हीरोइन, कोकीन, ड्रग पेपर, अफीम और चरस बरामद की है। यह तो वह हिस्सा है, जिसे पुलिस पकड़ पाई कितनी नशा बिका, कितना धुएं में उड़ा और कितना हलक में उतर गया, इसका तो कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। यूं तो सरकार लंबे समय से नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर चिंता दर्शा रही है, लेकिन नशा विरोधी नीति तैयार करने में उतनी गंभीरता नहीं दिखा पाई है।
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2017 में देहरादून की तत्कालीन एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने निजी नशा मुक्ति केंद्रों पर सवाल उठाते हुए सरकारी स्तर पर ऐसे केंद्र खोलने की वकालत की थी। पुलिस मुख्यालय के माध्यम से सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। इसी कड़ी में तीन माह पहले नशीले पदार्थों को लेकर चंडीगढ़ में में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्रदेश के सीएम त्रिवेंद्र रावत, प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी शामिल हुए थे। इस बैठक में पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के साथ नशा विरोधी नीति के अलावा नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर जारी गाइड लाइन को लेकर चर्चा की थी।
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चंडीगढ़ से लौटने के बाद मुख्य सचिव उत्पल कुमार इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ एक बैठक भी कर चुके हैं। बैठक में देहरादून और हल्द्वानी में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र खोलने पर सहमति हुई थी, लेकिन पूरी कार्ययोजना परवान नहीं चढ़ सकी है। राजपुर स्थित जागृति फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र से 43 रोगियों की फरारी की घटना के बाद बुधवार को पुलिस महकमे में नशा मुक्ति केंद्रों की अव्यवस्थाओं का मुद्दा छाया रहा।
ड्रग्स कारोबार पर लगाम कसने के लिए एंटी ड्रग्स नीति जरूरी है। इसी कारण नशा मुक्ति केंद्राें के संचालन को लेकर किसी तरह की गाइड लाइन नहीं है। शासन स्तर पर पहले देहरादून और हल्द्वानी में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र खोलने पर चर्चा हो चुकी है।
- अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था
ड्रग्स कारोबार रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। उत्तर भारतीय राज्य आपस में मिलकर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। इसके लिए चंडीगढ़ में बने नोडल कार्यालय से प्रदेश को जोड़ा जा रहा है। ठोस नीति तैयार कर इसपर पूरी तरह से रोकथाम की जाएगी।
- उत्पल कुमार, मुख्य सचिव