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एएसआई की टीम पर पुजारियों ने लगाया जागेश्वर मंदिर में जूते पहनकर आने का आरोप

Mon, 09 Dec 2019 10:13 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 09 Dec 2019 10:13 AM IST
सार

  • जागेश्वर धाम में अलाव जलाने को लेकर पुजारियों और एएसआई में ठनी
  • पुजारियों ने लगाया अंगीठी नदी में फिंकवाने और मंदिर में जूते पहनकर आने का आरोप
  • एएसआई के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून अधीक्षक ने आरोपों को निराधार बताया

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Allegations to wear slippers on Archaeological Survey of India team Jageshwar Dham
जागेश्वर धाम

विस्तार

जागेश्वर धाम में अलाव जलाने को लेकर पुजारियों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के बीच ठन गई है। पुजारियों का कहना है कि ठंड के मौसम में अंगीठी जलाई गई थी, जिसे एएसआई के अधिकारियों ने नदी में फिंकवा दिया।

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दूसरी ओर, एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार मंदिर परिसर में आग नहीं जलाई जानी चाहिए। इसलिए अंगीठी मंदिर परिसर से बाहर रखवाई गई।एएसआई के पास जागेश्वर धाम के मंदिरों के संरक्षण की जिम्मेदारी है।
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शनिवार को एएसआई क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून के अधीक्षक डॉ. राजकुमार पटेल और अन्य अधिकारी जागेश्वर धाम पहुंचे थे। उन्होंने सुधारीकरण कार्य का जायजा लिया। एएसआई के क्षेत्रीय अधीक्षक डॉ. राज कुमार पटेल ने बताया कि महामृत्युंजय मंदिर के सामने पुजारी बड़ी अंगीठी में आग जलाते मिले, जिससे काफी धुआं उठ रहा था। इस पर उन्होंने पुजारियों से मंदिर परिसर के सामने आग नहीं जलाने को कहा। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में आग जलाना प्रतिबंधित है। धुएं से मंदिरों को नुकसान पहुंचेगा।
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दूसरी ओर पुजारियों का कहना है कि मंदिर परिसर में काफी ठंड है। ठंड से बचने के लिए पूर्व से ही पुजारी मंदिर परिसर में आग जलाते आ रहे हैं। पुजारियों का आरोप है विभाग के कार्मिकों ने अंगीठी जटागंगा नदी में फेंक  दी। पुजारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि एएसआई के अधिकारी मंदिर में जूते पहन कर आए थे, जबकि क्षेत्रीय अधीक्षक डा. पटेल का कहना है कि मंदिर परिसर में जूता स्टैंड बना है।


वह पारिवारिक कारणों के चलते किसी भी मंदिर के भीतर नहीं गए। मंदिर परिसर के दूसरी ओर जटागंगा नदी में जाने के लिए उन्होंने जूते पहने थे। उन्होंने पुजारियों के अंगीठी को फिंकवाने के आरोप से इनकार करते हुए कहा कि अंगीठी को मंदिर परिसर के बाहर रखवाया गया।

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