बारिश और भूकंप के साथ उत्तराखंड में आया मानसून
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आखिरकार उत्तराखंड में मानसून ने दस्तक दे दी है। राज्य मौसम विभाग ने उत्तराखंड में मानसून की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही मौसम विभाग राज्य में दो दिन भारी बारिश की चेतावनी भी दी है।
उधर, मंगलवार देर रात ढाई बजे उत्तराकाशी में भूंकप का झटका महसूस किया गया। जिसकी तीव्रता तीन रिक्टर मापी गई।
दो साल पहले केदारनाथ में आपदा इन्हीं दिनों मौसम विभाग के अलर्ट के बीच आई थी। अब फिर बुधवार से भारी बारिश के आसार बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद सरकार ने सभी जिलों को चौकन्ना रहने को कह तो दिया है लेकिन उसका चार धाम यात्रा का मोह नहीं छूट पा रहा है। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि यात्रा बाधित न हो जबकि भारी बरसात में सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को ही होने की आशंका है।
यात्रियों को रोकने की मंशा फिलहाल जाहिर नहीं की जा रही है। मौसम विभाग ने यात्रियों को बरसात और तापमान कम होने पर एहतिहात बरतने का सुझाव दिया है।
मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर 24 से 26 जून तक अधिकतर स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। अलर्ट मिलते ही सरकार भी हरकत में आई। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सभी जिलाधिकारियों को सचेत रहने के निर्देश जारी किए।
चार धाम यात्रा मार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर खास निगाह रखने को कहा गया। जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन इकाइयों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। मुख्य सचिव एन रविशंकर ने एसडीआरएफ सहित संबंधित विभागों से बातचीत की।
उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। मुख्य सचिव एन रविशंकर ने भी शासन स्तर पर अधिकारियों की बैठक ली और जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। मुख्य सचिव ने तैयारी का भी जायजा लिया।
सटीक पूर्वानुमान न होने से पशोपेश में सरकारी तंत्र
अलर्ट की तीव्रता, गंभीरता को लेकर सरकार और मौसम विभाग के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है। प्रदेश में अलग-अलग तापमान क्षेत्र होने से हर जगह के लिए सटीक पूर्वानुमान देना तकनीकि रूप से मौसम विभाग के लिए संभव नहीं हो पा रहा है।
दूसरी ओर आपदा प्रबंधन विभाग की दलील है कि सटीक जानकारी मिलने पर ही ऐहतियातन कदम उठाया जा सकता है। ऐसे में मौसम विभाग का मंगलवार को जारी अलर्ट चार धाम यात्रा में रोड़ा ही अधिक माना जा रहा है। आपदा के दो साल बाद भी मौसम की सटीक जानकारी का तंत्र प्रदेश में विकसित नहीं हो पाया है।
जून 2013 की केदारनाथ आपदा के तुरंत बाद मौसम विभाग के अलर्ट को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ था। प्रदेश सरकार का कहना था कि मौसम विभाग ने भारी बरसात का सामान्य अलर्ट जारी किया था जबकि विभाग की दलील थी कि पूर्व चेतावनी जारी कर दी गई थी।
केदारनाथ की आपदा के बाद इतना जरूर है कि मौसम विभाग के अलर्ट को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। प्रदेश में एसडीआरफ का गठन किया जा चुका है और जिला प्रशासन भी अपनी तरफ से संवेदनशील है। पर मौसम की सटीक जानकारी का तंत्र प्रदेश में विकसित नहीं हो पाया है।
भारी बरसात से प्रदेश में नदी नालों का उफनना, बादल फटना, भूस्खलन आदि आपदाएं जुड़ी हुई हैं। इन सब मामलों में बरसात का पानी गुजर जाने के बाद ही आपदा प्रबंधन तंत्र कुछ करने की स्थिति में होता है। दूसरी ओर चार धाम यात्रा को लेकर सरकार का अलग आग्रह है।
मौसम विभाग का कोई भी अलर्ट चार धाम यात्रा के लिए भी खतरे की घंटी है। ऐसे में सरकारी मशीनरी की कोशिश यह भी है कि चार धाम यात्रा को न रोका जाए। ऐसे में मौसम विभाग और सरकार के बीच रस्साकसी का खेल भी शुरू होता दिख रहा है।
चार धाम यात्रा को लेकर मोह बरकरार
भारी बारिश का अलर्ट जारी होने के बाद भी चारधाम यात्रा के प्रति सरकार का मोह बरकरार है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिलाधिकारियों से कहा है कि किसी भी तरह यात्रा बाधित न हो। जबकि भारी बरसात की स्थिति में यात्री जारी रखना जोखिम भरा हो सकता है।
लेकिन सरकार चारधाम यात्रा को पर्यटन और प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ मानती है, लिहाजा मौसम के अलर्ट मात्र से यात्रा को रोकने की मंशा फिलहाल जाहिर नहीं की जा रही है। हालांकि, मौसम विभाग ने यात्रियों को एहतियात बरतने का सुझाव दिया है।
मौसम विभाग की चेतावनी
- उत्तरकाशी, चमोली, रुदप्रयाग और पौड़ी के छिटपुट (आइसोलेटिड) स्थानों में अगले 72 घंटों में हो सकती है (मे अकर) है भारी बरसात (रादर हैवी टू हैवी रेन)
- रादर हैवी टू हैवी रेन : 35.6 से लेकर 124.4 मिमि बरसात
- आइसोलेटिड-25 प्रतिशत से कम क्षेत्र
- मे अकर-26 से 50 प्रतिशत तक भारी बरसात की संभावना
- मौसम विभाग के अलर्ट को नारंगी रंग में जारी किया गया है। जिसका मतलब है कि तैयारी पूरी रखें