रामपाल, आसाराम जैसों की दुकान बंद करेगी यह संस्था!
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संतों की चली तो फर्जी आचार्यों और फर्जी शंकराचार्यों पर संतों के संगठन शिकंजा कसेंगे। अगले बरस होने वाले नासिक कुंभ के बाद कोई भी साधु यूं ही संत नहीं बन पाएगा।
संत बनने के लिए साधुओं की किसी न किसी परंपरा से जुड़ना जरूरी होगा। जो भगवाधारी या श्वेत वस्त्रधारी नहीं जुड़ेंगे, उनके खिलाफ संत संगठन स्वयं बाहर आकर कार्रवाई करेंगे।
अखिल भारत अखाड़ा परिषद, अभा संत समिति, रामानंद संप्रदाय, संन्यास परिषद, षडदर्शन साधु समाज, भारत साधु समाज, साध्वी परिषद आदि कई संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। यही नहीं अखाड़ों के बैनर तले एक विशिष्ठ धर्म संसद भी इस संबंध में हो सकती है। बैठक बुलाने की पहल अखाड़ा परिषद करेगी।
फर्जी आचार्यों और शंकराचार्यों पर भी शिकंजा
गतिविधियां अभी से शुरू कर दी गई हैं, मुख्य निर्णय नासिक कुंभ के धर्म सम्मेलन में लिया जाएगा। अखाड़ा परिषद इस बारे में अपने बैनर तले धर्म संसद आयोजित कर सकती है।
परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास ने बताया कि शंकराचार्यों, रामानंदाचार्यां, रामानुजाचार्यों, आचार्यों के लिए भी आचार संहिता बनी हुई है। दुख का विषय यह है कि इसका पालन कोई यूनिट नहीं कराती। अखाड़ा परिषद स्वयं यह दायित्व निभाएगी।
अब कोई रामपाल या आसाराम जैसे यूं ही स्वयं को संत नहीं कह पाएंगे। बृहद स्तर पर निर्णय लेने के लिए पहले अखाड़ा परिषद स्वयं बैठेगी और बाद में सभी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श किया जाएगा। नासिक कुंभ में फर्जी साधुओं के लिए आखिरी कील ठोक दी जाएगी।