डॉक्टरों को ट्रेनिंग देगा एम्स, शामिल होंगे सरकारी और गैरसरकारी चिकित्सक
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश शाखा सूबे के सभी सरकारी, गैर सरकारी चिकित्सकों को प्रशिक्षित करेगा। इसकी प्रक्रिया इसी माह से शुरू होगी। फेज वन में संस्थान एम्स के चिकित्सकों को ही विभिन्न मेडिकल कोर्स की ट्रेनिंग कराएगा। इसके बाद राज्य के सरकारी और उसके बाद निजी चिकित्सकों को विभिन्न कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थान द्वारा चिकित्सकों को विभिन्न कोर्स के जरिए दक्ष बनाए जाने के इस निर्णय का लाभ रोगियों को मिलेगा।
एम्स संस्थान ने उत्तराखंड में कार्यरत डॉक्टरों को अपने स्तर से प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। इसकी पहल संस्थान अपने चिकित्सकों से करेगा। पहले फेज में एम्स में कार्यरत चिकित्सकों को ही प्रशिक्षित किया जाएगा।
जिसके तहत उन्हें एक-एक दिवसीय एडवांस कॉर्डिट लाइफ सपोर्ट कोर्स, बेसिक लाइफ सपोर्ट कोर्स, एडवांस टारगेट लाइफ सपोर्ट कोर्स, एडवांस ट्रामा लाइफ सपोर्ट कोर्स आदि अनेक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में दक्ष बनाया जाएगा। संस्थान द्वारा इस तरह के कोर्स देने का उद्देश्य रोगियों को एम्स संस्थान से बाहर भी बेहतर चिकित्सा सुविधा देना है।
एम्स प्रशासन के अनुसार सभी कोर्स एक-एक दिन के होंगे। जिसमें चिकित्सकों के ज्ञान की थाह ली जाएगी और उन्हें दक्ष बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें दिए गए प्रशिक्षण की परीक्षा भी ली जाएगी। इस परीक्षा को पासआउट करने वाले चिकित्सकों को एम्स संस्थान बाकायदा सर्टिफिकेट जारी करेगा। एम्स प्रशासन की मानें तो यह सर्टिफिकेट चिकित्सकों को प्रेक्टिस के लिए लाईसेंस लेने में आने वाली दिक्कतों में सहायक साबित होगा।
14 से शुरू होगी ट्रेनिंग
एम्स प्रशासन ने 14 मई से चिकित्सकों के लिए कोर्स शुरू करेगा। जिसमें प्रथम फेज में संस्थान के चिकित्सकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसके बाद राज्य के सरकारी चिकित्सकों और उसके बाद निजी चिकित्सकों को विभिन्न मेडिकल कोर्स कराए जाएंगे।
एम्स रोगियों की बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए सभी चिकित्सकों को अपने यहां विभिन्न कोर्स कराएगा। जिसमें उनके ज्ञान की थाह ली जाएगी, साथ ही उन्हें नई चिकित्सकीय जानकारियां दी जाएंगी। चिकित्सकों की दक्षता के लिए यह कोर्स लगातार जारी रहेंगे।
ऋषिकेश एम्स के निदेशक प्रो. डा. रवि कांत ने बताया कि जिसमें चरणबद्ध ढंग से 100 से 150 चिकित्सकों की खेप को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे रोगियों को अच्छी चिकित्सा सहायता मिलेगी, साथ ही डॉक्टर्स को वर्किंग लाइसेंस के लिए एम्स द्वारा जारी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र मददगार साबित होगा।