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एम्स ऋषिकेश: उत्तराखंड में स्क्रब टाइफस बड़ा खतरा, गंभीरता से लेने की जरूरत
Thu, 23 Sep 2021 02:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 23 Sep 2021 02:51 PM IST
सार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुताबिक पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में स्क्रब टाइफस एक बड़ा खतरा है।
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स्क्रब टाइफस संक्रामक रोग है
- फोटो : विकीपीडिया
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विस्तार
मवेशियों के शरीर पर पाए जाने वाले माइट्स (घुन कीट) के कारण स्क्रब टाइफस संक्रामक रोग होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में गोशालाएं घरों के नीचे या पास में बनाई जाती हैं। जिससे जानलेवा संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के सामुदायिक एवं फेमिली मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और आउटरीच सेल के नोडल अफसर डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि स्क्रब टाइफस माइट्स में मौजूद ओरएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टरिया के कारण होने वाला रोग है। यह माइट्स मुख्य तौर पर दुधारू और कृषि उपयोगी मवेशियों, जंगलों और गॉर्डन में पाया जाता है।
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डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में अधिकांश क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन लोगों की आजीविका के मुख्य स्त्रोत है। पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों में गोशालाएं घरों के नीचे या ठीक बगल में बनाई जाती हैं। जिससे माइटस घरों में दाखिल हो जाते हैं। इन माइट्स के काटने से व्यक्ति स्क्रब टाइफस के संक्रमण की चपेट में आ जाता है। इसलिए संक्रमण की रोकथाम के घरों और जानवरों की साफ-सफाई पर जोर देना और सावधानी बरतना जरूरी है।
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डेंगू सीजनल, स्क्रब टाइफस पूरे साल
एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि डेंगू एक मौसमी संक्रामक रोग है। जून से अक्तूबर के बीच डेंगू के मामले सामने आते हैं। जबकि स्क्रब टाइफस का संक्रमण पूरे साल भर रहता है। पूरे साल भर गांवों में के मामले सामने आते हैं। यह डेंगू कि तरह अगर स्क्रब टाइफस के लक्षणों को नजर अंदाज कर दिया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
डेंगू की तरह की निगरानी की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग डेंगू के मामलों की रिपोर्ट तैयार करता है। एंटीजन जांच में डेंगू पॉजिटिव आने के बाद संक्रमण की पुष्टि के लिए मरीज की एलाइजा जांच भी कराई जाती है। अस्पतालों में डेंगू के सीजन में आइसोलशन वार्ड की व्यवस्था की जाती है। वहीं स्क्रब टाइफस की दैनिक मामलों की निगरानी, आइसोलेशन वार्ड और दवाओं की व्यवस्था जैसे इंतजाम नहीं होते हैं। डॉ. संतोष कुमार ने बताया स्क्रब टाइफस की निगरानी और उपचार के इंतजामों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
पहला एक सप्ताह महत्वपूर्ण
एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि सिरदर्द, तेज बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द, रैशेज और माइट्स के काटने वाले स्थान में काला गोल निशान स्क्रब टाइफस के प्राथमिक लक्षण है। यह लक्षण पहले एक सप्ताह तक बने रहते हैं। दवाओं के सेवन के बाद भी 102 से 103 डिग्री फारेनहाइट बुखार, सांस फूलना, बेहोशी, दौरे पड़ना, निमोनिया, अंदरुनी अंगों से रक्तस्त्राव शुरू होना संक्रमण की गंभीर लक्षण हैं।
कैसे करें बचाव
- दुधारू और कृषि उपयोगी पशुओं की रहने की व्यवस्था घर से दूर करें
- कुत्ते बिल्ली जैसे पालतु जानवरों को साफ रखें
- घर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें
- जंगल, घास और गार्डन में जमीन पर न लेटे
- नंगे पैर न चलें।
- जंगलों में बड़ी झाड़ियों में न घुसें
- बुखार न उतरने और सांस फूलने पर तुरंत दिखाए