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अफगानिस्तान संकट: देहरादून के 300 से अधिक लोग काबुल में फंसे, परिजनों की सांसें अटकीं

Tue, 17 Aug 2021 10:40 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 17 Aug 2021 10:40 PM IST
सार

अफगानिस्तान में फंसे दून के लोगों में ज्यादातर पूर्व सैनिक हैं जो वहां के यूरोपियन, ब्रिटिश एंबेसी सहित अन्य जगहों पर सुरक्षा में तैनात थे।

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Afghanistan Crisis News: More than 300 people from Dehradun Stuck in Kabul
अफगानिस्तान में फंसे अपनों को याद कर रोते परिजन - फोटो : राजीव गुप्ता, अमर उजाला

विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबानियों का कब्जा होने के बाद हजारों भारतीय अफगानिस्तान में फंस गए हैं। इनमें दून के भी तीन सौ से अधिक लोग शामिल हैं जो चार दिन से एक जगह पर हैं लेकिन उन्हें एयरपोर्ट जाने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। इनमें से कुछ लोग वीडियो जारी कर भारत सरकार ने लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। इधर उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। वे उनकी सलामती और  सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रार्थना कर रहे हैं। 

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अफगानिस्तान में फंसे दून के लोगों में ज्यादातर पूर्व सैनिक हैं जो वहां के यूरोपियन, ब्रिटिश एंबेसी सहित अन्य जगहों पर सुरक्षा में तैनात थे। दून गल्वाडी, अनारवाला, गजियावाला, डोईवाला, नेहरूग्राम सहित विभिन्न स्थानों में रह रहे उनके परिजन सोशल मीडिया पर उनके वीडियो देख हलाकान हो गए हैं। उनकी आंखों में आंसू हैं।
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हर वक्त उनके कान और आंखें टीवी और फोन पर टिकी हुई है। जिन लोगों के पति, भाई और अन्य रिस्तेदार अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं, उनका कहना है कि मजबूरी में सभी लोग  नौकरी के लिए अफगानिस्तान गए। अगर लोगों को भारत में ही अच्छी सैलरी और नौकरी मिलती तो उन्हें वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कहा कि भारत सरकार को अब इस बारे में सोचना चाहिए। 

चार दिन से एक ही कमरे में हैं 140 लोग, नहीं मिल रहा खाना 
काबुल में फंसे नेहरू ग्राम निवासी नरेंद्र के साथ ही इंद्रानगर गल्जवाड़ी निवासी श्याम ठकुरी ने वीडियो के जरिए परिजनों को बताया कि वह चार दिन से एक ही कैंप में फंसे हुए हैं। यहां 140 भारतीय एक ही कमरे में हैं। न तो उन्हें खाने को कुछ मिला है और न ही सो पाए हैं। बैठने और रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कंपनी में वह काम करते थे, उसने उन्हें छोड़ दिया है। वह भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह सभी को यहां से सुरक्षित निकाल लें। उनकी पत्नी रुचि ठकुरी ने बताया कि मंगलवार दो बजे पति से बात हुई थी। फिलहाल वह सुरक्षित हैं, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। बताया कि पांच साल से वह यूरोपियन एंबेसी में काम करते थे। अभी पिछले दिसंबर में छुट्टी काटकर वापस आए थे। 

सीएम धामी ने दिलाया मदद का भरोसा
अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों को सकुशल वापस प्रदेश लाने के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भरोसा दिलाया है। 

नहीं मिलता फोन तो हो जातीं हैं परेशान

इंद्रानगर गल्जवाड़ी में रहने वालीं रुचि काला, पूूनम थापा और विनिता अधिकारी के पति भी अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार फंसे लोगों का तत्काल वापस लेने का इंतजाम करे। हालांकि वीडियो कॉल के माध्यम से वह लगातार फंसे अपनों के संपर्क में हैं, लेकिन कुछ देर अगर फोन नहीं मिल रहा तो वे परेशान हो जाती हैं। 

कुछ खुशकिस्मत रहे जो लौट गए 
दून के कुछ लोग ऐसे थे जो ब्रिटिश एंबेसी में काम करते थे। गल्जवाड़ी निवासी दीपक अधिकारी की पत्नी विनिता अधिकारी ने बताया कि उनके पति करीब डेढ़ सौ लोगों के साथ 15 अगस्त को वहां से निकल गए थे। वहां से उन्हें दुबई और फिर लंदन ले जाया गया। हालांकि वह अभी तक घर नहीं लौटे हैं, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि वह सुरक्षित वहां से निकल गए हैं, लेकिन अभी उनका भाई वहीं फंसा हुआ है। उन्हें वहां से आने नहीं दिया जा रहा है। 

अफगानिस्तान के मसले पर सामने आई केंद्र की विफलता : हरीश
अफगानिस्तान में फंसे भारतीय लोगों को लेकर पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की विफलता बताया है। हरीश रावत ने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति बहुत चिंताजनक है। हमारे वह लोग, जो भारत माता की सेवा और अपने मित्र देश की मदद करने के लिए अफगानिस्तान गए, आज उनका जीवन, उनका परिवार संकट में है।

तालिबान कंधार पहुंच गए और हम यह अंदाजा ही लगाते रह गए कि उनको आने में 30 दिन लगेंगे या 40 दिन लगेंगे। तालिबान ने काबुल को घेर लिया। केंद्र सरकार की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि अफगानिस्तान में फंसे हुए हमारे नागरिकों और हमारे भाईयों को वापस सुरक्षित भारत लाए।

अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंडियों को लेकर लगातार केंद्र सरकार के संपर्क हैं। अफगानिस्तान से वापसी की कार्रवाई भारत सरकार को ही करनी है। सरकार लगातार इस मामले में नजर बनाए हुए है। उनका प्रयास होगा कि अफगानिस्तान में फंसे सभी उत्तराखंडी सही सलामत वापस लौटे। 
 - आनंद बर्धन, अपर मुख्य सचिव गृह

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