उत्तराखंड: चमकी बुखार ने लीची कारोबारियों की कमर तोड़ी, कारोबार में आई भारी गिरावट
बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार का वायरस लीची से फैलने की चर्चा ने लीची कारोबारियों को तगड़ा झटका दिया है। कई दिन पहले 120 से 140 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव में बिकने वाली लीची अब 60 से 70 किलो के भाव में बिक रही है।
इससे जहां फल व्यापारी परेशान हैं तो वहीं इस अफवाह ने लीची उत्पादकों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी मस्तिष्क ज्वर का प्रकोप फैला हुआ है।
इस बीमारी से सौ से अधिक मासूमों की जान चली गई है। इस बुखार के फैलने के बाद यह भी चर्चा तेजी से फैली हुई है कि लीची के कारण इस बुखार का वायरस फैल रहा है। कई दिन से व्हाट्सएप, फेसबुक पर इस तरह की पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें लीची के कारण ही इस बुखार का वायरस फैलने की बात कहीं जा रही है।
जनपद हरिद्वार के सुभाषगढ़, बादशाहपुर, कनखल, ज्वालापुर, मंगलौर क्षेत्र के अलावा देहरादून में पैदा होने वाली लीची दूसरे राज्यों में भेजी जाती है, लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार लीची के फैलने की अफवाह से अब लोगों ने लीची को खरीदना कम कर दिया है।
एक फल व्यापारी ने बताया कि कई दिन पहले उनकी दुकान पर 10 से 15 किलो तक लीची की बिक्री हो रही थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से न के बराबर रह गई है। फल व्यापारी नसीम ने बताया कि इस अफवाह से लोग लीची खरीदना पसंद नहीं कर रहे हैं।
वैसे लक्सर क्षेत्र में इस तरह का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है। ग्रामीण दिनेश अग्रवाल ने बताया कि उनके परिवार के लोगों ने बाजार से लीची खरीद कर खाई है, लीची से कोई खतरा नहीं है।
फल व्यापारी सन्नी अग्रवाल ने बताया कि कई दिन से उनकी दुकान पर लीची के ग्राहक नहीं आ रहे हैं। इसके चलते उन्होंने लीची बेचना बंद कर दिया है। खरीद न होने की वजह से दुकान पर रखी लीची सूखती जा रही है।
लीची व्यापारियों को चमकी बुखार का वायरस लीची के फैलने की अफवाहें ने तगड़ा झटका दे दिया है। बाजार में ग्राहकों की ओर से लीची न खरीदने की वजह से लीची का उत्पादन करने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।