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अशासकीय स्कूलों की मनमानी पर लगेगा ब्रेक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 13 Oct 2014 10:03 AM IST
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प्रबंधन समितियों की मनमानियों की वजह से उत्तराखंड के अधिकतर अशासकीय विद्यालयों पर संकट के बादल छा गए हैं।
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आरोप हैं कि ऐसे स्कूलों को खत्म करके उनकी जगह निजी स्कूल खोलने की तैयारी है। कुछ स्कूलों में तो बिना मान्यता के ही निजी स्कूल चलने भी लगे हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे स्कूलों में नियमों को ताक पर रखकर कई तरह के कार्य हो रहे हैं।
अशासकीय स्कूलों में इन दिनों चल रही शिक्षकों की भर्ती में प्रबंधन खुली मनमानी कर रहे हैं। मानकों को ताक पर रखकर अधिकतर स्कूलों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रबंधन पदाधिकारियों के रिश्तेदारों को नियुक्ति दी जा रही है।
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कुछ स्कूलों में भर्ती प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक ही नहीं की जा रही। स्कूलों में फर्जी छात्र संख्या दर्शाकर शिक्षकों की जरूरत बताई जा रही है।
शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल का कहना है कि ऐसे कुछ स्कूलों की शिकायतें मिली हैं। बताया कि जिन स्कूलों में भर्ती में गड़बड़ी हुई है, वहां जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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प्रबंधक ने रिश्तेदार को बनाया प्रिंसिपल
बाल भारती विद्या निकेतन जूनियर हाईस्कूल ऋषिकेश में प्रबंधक ने अपनी रिश्तेदार को स्कूल की प्रिंसिपल बना दिया है। आरोप है कि प्रिंसिपल कभी कभार स्कूल आती हैं।
यही नहीं, स्कूल परिसर में ही दूसरा स्कूल खोल दिया गया है, जो बिना मान्यता के चल रहा है। सीईओ एसपी खाली के मुताबिक स्कूल की प्रिंसिपल को सस्पेंड करने और प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। बीईओ को मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गुपचुप चल रही भर्ती प्रक्रिया
राजधानी के एक अशासकीय विद्यालय में गुपचुप तरीके से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। खुड़बुड़ा स्थित इस स्कूल में प्रिंसिपल तैनात नहीं है। यहां जो प्रवक्ता तैनात हैं, वे भी सत्र लाभ पर हैं, लेकिन उन्हें चयन बोर्ड में शामिल कर शिक्षकों की भर्ती की जा रही है।
भर्ती के लिए अधिक अभ्यर्थी आवेदन न कर लें, इसके लिए मानकों की अनदेखी कर विज्ञप्ति को कुछ ऐसे समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया गया है, जिनका प्रसार बहुत ही कम है।