Uttarakhand News: शिक्षकों का तबादला एक्ट दरकिनार,अब 30 जुलाई तक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया
पिछले तीन साल से शून्य सत्र घोषित किए जाने से वर्षों से तबादलों की आस लगाए शिक्षकों के अनिवार्य तबादले नहीं हो पाए हैं। हालांकि शून्य सत्र के बावजूद विभाग में पूरे साल तबादलों एवं शिक्षकों की संबद्धता का खेल चलता रहा। विधानसभा चुनाव से पहले लगभग सात सौ से अधिक शिक्षकों के तबादले किए गए।
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इस बार तबादला एक्ट के अनुरूप तय समय पर शिक्षकों के तबादले नहीं होंगे। एक्ट को दरकिनार कर 50 दिन देरी से तबादले किए जाने की तैयारी है। विभाग की ओर से पहले 10 जुलाई तक तबादले का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन हाल ही में कुछ शिक्षकों के तबादलों के बाद एक्ट की समय-सारणी के अनुसार तबादलों की तैयारी गड़बड़ा गई है।
अब 30 जुलाई तक तबादलों का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। शिक्षा विभाग में विभिन्न वजहों से पिछले तीन साल से शून्य सत्र घोषित किए जाने से वर्षों से तबादलों की आस लगाए शिक्षकों के अनिवार्य तबादले नहीं हो पाए हैं। हालांकि शून्य सत्र के बावजूद विभाग में पूरे साल तबादलों एवं शिक्षकों की संबद्धता का खेल चलता रहा। विधानसभा चुनाव से पहले लगभग सात सौ से अधिक शिक्षकों के तबादले किए गए।
चुनाव आचार संहिता की वजह से उस दौरान इन शिक्षकों को नए तैनाती स्थलों पर नहीं भेजा जा सका था। विधानसभा चुनाव के दौरान हुए शिक्षकों के तबादलों से रोक हटाते हुए इनकी तैनाती के आदेश कर दिए गए हैं। जिससे विभाग में तबादला एक्ट के अनुसार तबादलों की प्रक्रिया गड़बड़ा गई है और इस साल तय समय पर शिक्षकों के तबादले नहीं हो पा रहे हैं।
एक्ट के मुताबिक यह है समय-सारणी
प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए तबादला एक्ट बना है। वर्ष 2017 में बने उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम के अनुसार हर साल तबादलों के लिए समय-सारणी बनी है। इसके मुताबिक 31 मार्च तक विभागाध्यक्ष कार्यस्थल का मानक के अनुसार चयन करेंगे। 15 अप्रैल तक तबादलों के लिए पात्र कर्मचारियों की सूची वेबसाइट पर प्रदर्शित होगी और 10 जून तक तबादलों के आदेश जारी हो जाने चाहिए, लेकिन विभाग की ओर से पहले 10 जुलाई तक तबादला आदेश की अंतिम तिथि तय की गई। जबकि अब इसे बढ़ाकर 30 जुलाई तक किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।
खाली पदों पर होंगे शिक्षकों के तबादले
शिक्षा विभाग में इस बार शिक्षकों के जिनते भी पद खाली हैं, उनके अनुरूप तबादले किए जाने की तैयारी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तबादलों से इन पदों को भरा जाएगा।
शिक्षकों के पारदर्शी तबादलों के लिए एक्ट बना है, लेकिन जब से एक्ट बना है, कभी भी इसके अनुसार शिक्षकों के तबादले नहीं हुए। तबादलों में जब मनमानी होनी है तो एक्ट को रद्द कर देना चाहिए।
डॉ.सोहन माजिला, प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ
तबादला एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव
देहरादून। प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों के लिए तबादला एक्ट संशोधित किया जाएगा। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के पास इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है। शिक्षा विभाग में अटल उत्कृष्ट स्कूलों में शिक्षकों को कम से कम पांच साल के लिए तैनात किया गया है। इन स्कूलों में तैनाता शिक्षक यदि सुगम क्षेत्र के स्कूलों में हैं तो उनकी एक साल की सेवा को दुर्गम की एक साल की सेवा माना जाएगा। जबकि दुर्गम क्षेत्र के स्कूलों में तैनात शिक्षकों की एक साल की सेवा को दो साल की दुर्गम की सेवा के समान माना जाएगा। इन स्कूलों के शिक्षकों को तबादला एक्ट से भी मुक्त रख इनके लिए अगल से तबादला नीति बनेगी।
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शिक्षकों के तबादलों के लिए शासन से कुछ और समय मांगा जा रहा है। इसके लिए समय-सारणी में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन से 15 से 20 दिन का समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
-बंशीधर तिवारी, शिक्षा महानिदेशक