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देहरादून में 25 बाल संरक्षण केंद्र गैर पंजीकृत, नोटिस जारी

Tue, 21 Jun 2016 09:12 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 21 Jun 2016 09:12 PM IST
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25 child protection center in Dehradun unregistered
नोटिस - फोटो : demo pic

मानव तस्करी के मामले पकड़े जाने के बाद देहरादून में किए गए सर्वेक्षण में 25 बाल संरक्षण गृह गैर पंजीकृत पाए गए। बिना पंजीकरण के इन बाल गृहों का संचालन किया जा रहा है।

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इस पर शासन ने इन बाल संरक्षण गृहों को नोटिस जारी कर दिया है। किशोर न्याय अधिनियम-2015 के प्रावधान के अनुसार इन बाल संरक्षण गृहों को पंजीकरण कराने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया गया है। समाज कल्याण विभाग में बिना पंजीकरण कराए किसी व्यक्ति या संस्था को बाल संरक्षण गृह संचालित करने की अनुमति नहीं है।
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इस वक्त देहरादून में 32 बाल संरक्षण गृह संचालित किए जा रहे हैं। सर्वे में सिर्फ 7 बाल संरक्षण गृह पंजीकृत पाए गए, बाकी बाल संरक्षण गृहों के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
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यह भी पता नहीं है कि इन बाल संरक्षण गृहों में कहां के बच्चे हैं? उनकी क्या व्यवस्था की गई है? उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है? यह भी पता चला है कि बाल संरक्षण गृह बच्चों को गोद दे रहे हैं। जिनको बच्चे गोद दिए जा रहे हैं, उनका भी कोई ब्यौरा समाज कल्याण विभाग के पास नहीं है। अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन ने बताया कि 15 जुलाई तक अगर बाल संरक्षण गृह पंजीकरण नहीं कराते तो कार्रवाई का सिलसिला शुरू होगा।

पंजीकरण न कराने पर सजा
- एक साल की कैद या एक लाख रुपये जुर्माना या फिर दोनों सजा एक साथ। अगर फिर भी संस्था संचालक पंजीकरण नहीं कराता है तो इसे नया जुर्म मानकर सजा रिपीट हो जाएगी।

- अगर जांच में पाया गया कि बाल संरक्षण गृह बच्चों के साथ अत्याचार कर रहा है तो संचालक को तीन साल की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों।
- गोद देने के लिए बाल संरक्षण गृहों को अलग से दत्तक ग्रहण अभिकरण में पंजीकरण कराना पड़ता है। इसके लिए जानकारी पहले सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्सेस एजेंसी (कारा) के पोर्टल पर अपलोड करनी पड़ती है। गोद लेने वाले व्यक्ति की जांच की जाती है। सही रिपोर्ट मिलने पर बच्चा गोद दिए जाने की अनुमति दी जाती है।

Published By : Nirmala Suyal

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