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दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल में खुलेगी हेल्प डेस्क
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दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल में खुलेगी हेल्प डेस्क
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल में अब मरीजों की मदद के लिए हेल्प डेस्क खुलेगी। जिन पर कर्मचारी तैनात रहेंगे और मरीजों और तीमारदारों की मदद करेंगे। बृहस्पतिवार को दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की अध्यक्षता में हुई सभी विभागाध्यक्षों की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना और चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने सभी विभागाध्यक्षों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि दोनों अस्पतालों में उपलब्ध सेवाओं, चिकित्सकों व अन्य सुविधाओं की जानकारी मरीजों को आसानी से मिल सके, इसके लिए हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी महेंद्र भंडारी और केएल गौतम को दी गई है। वहीं, स्वास्थ्य महानिदेशालय, सीएमओ कार्यालय और दून अस्पताल के बीच सामंजस्य बनाने की जिम्मेदारी डॉ. एनएस खत्री और डॉ. आरसीएस रावत को दी गई।
विभागाध्यक्ष को खर्च के अधिकार पर चर्चा
बैठक में हर विभागाध्यक्ष को पांच हजार रुपये मासिक खर्च करने का अधिकार देने पर भी चर्चा हुई। कई बार बहुत छोटे सामान की जरूरत होती है। इसकी कीमत बहुत कम होती है लेकिन उपयोगिता बहुत अधिक। उसके कारण काम रुक जाता है। अलग-अलग स्तर से अप्रूवल लेने में बहुत अधिक समय लगता है, जिससे मरीजों को दिक्कत होती है। अधिकारियों ने प्रस्ताव को शासन स्तर पर रखने का आश्वासन दिया है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल में अब मरीजों की मदद के लिए हेल्प डेस्क खुलेगी। जिन पर कर्मचारी तैनात रहेंगे और मरीजों और तीमारदारों की मदद करेंगे। बृहस्पतिवार को दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की अध्यक्षता में हुई सभी विभागाध्यक्षों की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना और चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने सभी विभागाध्यक्षों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि दोनों अस्पतालों में उपलब्ध सेवाओं, चिकित्सकों व अन्य सुविधाओं की जानकारी मरीजों को आसानी से मिल सके, इसके लिए हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी महेंद्र भंडारी और केएल गौतम को दी गई है। वहीं, स्वास्थ्य महानिदेशालय, सीएमओ कार्यालय और दून अस्पताल के बीच सामंजस्य बनाने की जिम्मेदारी डॉ. एनएस खत्री और डॉ. आरसीएस रावत को दी गई।
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विभागाध्यक्ष को खर्च के अधिकार पर चर्चा
बैठक में हर विभागाध्यक्ष को पांच हजार रुपये मासिक खर्च करने का अधिकार देने पर भी चर्चा हुई। कई बार बहुत छोटे सामान की जरूरत होती है। इसकी कीमत बहुत कम होती है लेकिन उपयोगिता बहुत अधिक। उसके कारण काम रुक जाता है। अलग-अलग स्तर से अप्रूवल लेने में बहुत अधिक समय लगता है, जिससे मरीजों को दिक्कत होती है। अधिकारियों ने प्रस्ताव को शासन स्तर पर रखने का आश्वासन दिया है।
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