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गंगा , हुगली नदियों का तैयार होगा जीआईएस डाटा, सर्वे आफ इंडिया में वैज्ञानिक सेमिनार
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। सर्वे ऑफ इंडिया के महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने बताया कि गंगा और हुगली जैसी नदियों की सेहत पर सर्वे ऑफ इंडिया बारीकी से नजर रख रहा है। स्वच्छ गंगा के लिए नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा के वैज्ञानिकों के साथ हाथ मिलाया गया है। इसके तहत गंगा और हुगली के दोनों किनारों पर 10 किमी चौड़े गलियारे के लिए हाई रेजुलेशन डिजिटल थ्रीडी मॉडल डीईएम और जीआईएस डाटाबेस तैयार किया गया है।
हाथीबड़कला स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित सेमिनार में महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय नदी को नया जीवन देने में सर्वे आफ इंडिया नमामि गंगे परियोजना को धरातल पर उतारने में योगदान देगा। गंगा में उन स्थानों को चिह्नित किया जाएगा जो इसकी स्वच्छता में बाधा बने हुए हैं। आईआईटी, इसरो समेत अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। सेमिनार में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि गंगा की स्वच्छ और अविरल बनाने की जिम्मेदारी सभी लोगों की है। लेकिन वैज्ञानिकों की भागीदारी अहम हैं। सेमिनार में इसरो, आईआईटी समेत देश के कई तकनीकी संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
सेमिनार में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा, आईआईआरएस के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट समेत कई वैज्ञानिकों ने हिमालय की पारिस्थितिकी पर प्रस्तुतिकरण दिया। कानपुर आईआईटी के प्रो. भरत लोहानी ने लाइडर मेपिंग के बारे मेें बताया। सेमिनार में डॉ. सर्वेश सिंघल, एमसीजी के उपाध्यक्ष पीयूष गुप्ता, वैज्ञानिक डॉ. मोहित कुमार आदि उपस्थित रहे।
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देहरादून। सर्वे ऑफ इंडिया के महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने बताया कि गंगा और हुगली जैसी नदियों की सेहत पर सर्वे ऑफ इंडिया बारीकी से नजर रख रहा है। स्वच्छ गंगा के लिए नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा के वैज्ञानिकों के साथ हाथ मिलाया गया है। इसके तहत गंगा और हुगली के दोनों किनारों पर 10 किमी चौड़े गलियारे के लिए हाई रेजुलेशन डिजिटल थ्रीडी मॉडल डीईएम और जीआईएस डाटाबेस तैयार किया गया है।
हाथीबड़कला स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित सेमिनार में महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय नदी को नया जीवन देने में सर्वे आफ इंडिया नमामि गंगे परियोजना को धरातल पर उतारने में योगदान देगा। गंगा में उन स्थानों को चिह्नित किया जाएगा जो इसकी स्वच्छता में बाधा बने हुए हैं। आईआईटी, इसरो समेत अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। सेमिनार में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि गंगा की स्वच्छ और अविरल बनाने की जिम्मेदारी सभी लोगों की है। लेकिन वैज्ञानिकों की भागीदारी अहम हैं। सेमिनार में इसरो, आईआईटी समेत देश के कई तकनीकी संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
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सेमिनार में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा, आईआईआरएस के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट समेत कई वैज्ञानिकों ने हिमालय की पारिस्थितिकी पर प्रस्तुतिकरण दिया। कानपुर आईआईटी के प्रो. भरत लोहानी ने लाइडर मेपिंग के बारे मेें बताया। सेमिनार में डॉ. सर्वेश सिंघल, एमसीजी के उपाध्यक्ष पीयूष गुप्ता, वैज्ञानिक डॉ. मोहित कुमार आदि उपस्थित रहे।
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