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प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली एक भी कंपनी ने नहीं कराया पंजीकरण
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प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली एक भी कंपनी ने नहीं कराया पंजीकरण
ब्यूरोे/अमर उजाला
देहरादून। राज्य में प्लास्टिक से उत्पाद बनाने या प्लास्टिक उत्पादों का आयात निर्यात करने वाली एक भी कंपनी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया है। प्रकरण को गंभीरता से लेेते हुए बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्घि ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अपने क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाकर उन कंपनियों व आयातकों-निर्यातकों को चिन्हित करें जो पंजीकृत नहीं है।
बोर्ड के सदस्य सचिव का सुबुद्धि का कहना है कि समीक्षा में यह बात सामने आई है कि वर्तमान में कोई भी कंपनी व आयातकर्ता कंपनी राज्य प्रदूषण बोर्ड में पंजीकृत नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि उनके उत्पादों द्वारा कुल कितना प्लास्टिक वेस्ट पैदा किया जा रहा है। साथ ही नियमानुसार कितना प्लास्टिक वेस्ट किन किन माध्यमों से एकत्रित कर उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि केेंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से प्लास्टिक अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के लिए ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पालिसी-2016’ लागू की है, लेकिन ज्यादातर राज्य इसका पालन नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में सभी राज्यों में प्लास्टिक कचरा तेजी से फैल रहा है जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा साबित होगा।
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ब्यूरोे/अमर उजाला
देहरादून। राज्य में प्लास्टिक से उत्पाद बनाने या प्लास्टिक उत्पादों का आयात निर्यात करने वाली एक भी कंपनी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया है। प्रकरण को गंभीरता से लेेते हुए बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्घि ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अपने क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाकर उन कंपनियों व आयातकों-निर्यातकों को चिन्हित करें जो पंजीकृत नहीं है।
बोर्ड के सदस्य सचिव का सुबुद्धि का कहना है कि समीक्षा में यह बात सामने आई है कि वर्तमान में कोई भी कंपनी व आयातकर्ता कंपनी राज्य प्रदूषण बोर्ड में पंजीकृत नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि उनके उत्पादों द्वारा कुल कितना प्लास्टिक वेस्ट पैदा किया जा रहा है। साथ ही नियमानुसार कितना प्लास्टिक वेस्ट किन किन माध्यमों से एकत्रित कर उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि केेंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से प्लास्टिक अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के लिए ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पालिसी-2016’ लागू की है, लेकिन ज्यादातर राज्य इसका पालन नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में सभी राज्यों में प्लास्टिक कचरा तेजी से फैल रहा है जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा साबित होगा।
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