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‘कृषि को बढ़ावा देने से रुकेगा पलायन’
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी में बुधवार को वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश से पलायन को रोकने के लिए किसानों, वैैज्ञानिकों ने खेती और किसानी को बढ़ावा देने पर मंथन हुआ।
बैठक में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रहे गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कृषि को बढ़ावा देने से ही पलायन रुकेगा। बेमौसमी फूल, फल और सब्जियों के उत्पादन के लिहाज से पर्वतीय जिलों की जलवायु मुफीद है। जरूरत सिर्फ पढ़े लिखे युवाओं को खेती से जोड़ने की है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को किसानों की मदद के लिए आगे आने की सलाह दी। कहा कि किसानों को उच्च तकनीक की जरूरत है, जिसे अपनाकर वो परंपरागत खेती की तुलना में फल, फूल, मशरूम सहित बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन कर पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोक सकते हैं। उन्होंने कृषि को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा कि यह नौबत पारिस्थितिकी असंतुलन के कारण आई है। खासकर बंदरो से फसल को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे।
भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बांके बिहारी ने किसानों को मिट्टी परीक्षण की जानकारी देते हुए मिट्टी की उपयोगिता के आधार पर ही उत्पादन की सलाह दी। इस दौरान सीडीओ जीएस रावत, डॉ. वाईपीएस डबास, डॉ. एसएन तिवारी, डॉ. एसबी पांडेय, डॉ. डीएस पांडेय, डॉ. बीएस कार्की, डॉ. डीसी डिमरी, डॉ. डीएचएस बिष्ट, प्रेमचंद शर्मा, श्यामा चौहान आदि मौजूद रहे।
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कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी में बुधवार को वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश से पलायन को रोकने के लिए किसानों, वैैज्ञानिकों ने खेती और किसानी को बढ़ावा देने पर मंथन हुआ।
बैठक में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रहे गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कृषि को बढ़ावा देने से ही पलायन रुकेगा। बेमौसमी फूल, फल और सब्जियों के उत्पादन के लिहाज से पर्वतीय जिलों की जलवायु मुफीद है। जरूरत सिर्फ पढ़े लिखे युवाओं को खेती से जोड़ने की है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को किसानों की मदद के लिए आगे आने की सलाह दी। कहा कि किसानों को उच्च तकनीक की जरूरत है, जिसे अपनाकर वो परंपरागत खेती की तुलना में फल, फूल, मशरूम सहित बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन कर पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोक सकते हैं। उन्होंने कृषि को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा कि यह नौबत पारिस्थितिकी असंतुलन के कारण आई है। खासकर बंदरो से फसल को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे।
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भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बांके बिहारी ने किसानों को मिट्टी परीक्षण की जानकारी देते हुए मिट्टी की उपयोगिता के आधार पर ही उत्पादन की सलाह दी। इस दौरान सीडीओ जीएस रावत, डॉ. वाईपीएस डबास, डॉ. एसएन तिवारी, डॉ. एसबी पांडेय, डॉ. डीएस पांडेय, डॉ. बीएस कार्की, डॉ. डीसी डिमरी, डॉ. डीएचएस बिष्ट, प्रेमचंद शर्मा, श्यामा चौहान आदि मौजूद रहे।
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