{"_id":"5c0d7876bdec2241b5203d1d","slug":"15443867185-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देखरेख न होने से कबाड़ हुई आधा दर्जन बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देखरेख न होने से कबाड़ हुई आधा दर्जन बसें
Updated Mon, 10 Dec 2018 01:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर। भारत सोवियत संघ के बीच हुए समझौते के तहत अस्तित्व में आई वीरभद्र (आईडीपीएल) फैक्ट्री की करीब आधा दर्जन बसें सालों से खड़ी धूल फांक रही हैं। वीरभद्र स्थित प्रसिद्ध दवा फैक्ट्री आईडीपीएल का 1962 में शिलान्यास हुआ। 1967 में उत्पादन की शुरुआत भी हो गई। सन 1976-77 में फैक्ट्री में 4500 से अधिक नियमित कर्मचारी थे। 1992 में इसे बीमारू इकाई घोषित किए जाने के बाद दुर्दिन शुरू हो गए। वर्तमान में इस फैक्ट्री में स्थाई कर्मचारी न के बराबर हैं।
एक समय में यहां आधा दर्जन से अधिक बसें नियमित रूप से चलती थीं। फैक्ट्री का अपना वर्कशाप और पैट्रोल पंप था। आज दोनों ही अस्तित्वहीन हो चुके हैं। अपने स्वर्णिम काल के दौरान आईडीपीएल के कर्मचारियों व उनके परिवार वालों के लिए नियमित रूप से शिफ्ट वाइज बसें ऋषिकेश जाती थीं। इतना ही नहीं ऋषिकेश स्थित तमाम इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेज में कर्मचारियों के अध्ययनरत बच्चों के लिए भी बसें संचालित होती थीं। मौजूदा स्थिति यह है कि आधा दर्जन बसें दो दशक से खड़ी खड़ी कबाड़ हो रही हैं।
-------
अब ये बसें चलने लायक नहीं रहीं। करीब बीस साल से खड़ी हैं। फैक्ट्री की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इनका मेंटीनेंस नहीं हो सका। इनकी नीलामी क्यों नहीं की गई इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
विज्ञापन
- समय सिंह, उपकार्मिक प्रबंधक आईडीपीएल
विज्ञापन
एक समय में यहां आधा दर्जन से अधिक बसें नियमित रूप से चलती थीं। फैक्ट्री का अपना वर्कशाप और पैट्रोल पंप था। आज दोनों ही अस्तित्वहीन हो चुके हैं। अपने स्वर्णिम काल के दौरान आईडीपीएल के कर्मचारियों व उनके परिवार वालों के लिए नियमित रूप से शिफ्ट वाइज बसें ऋषिकेश जाती थीं। इतना ही नहीं ऋषिकेश स्थित तमाम इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेज में कर्मचारियों के अध्ययनरत बच्चों के लिए भी बसें संचालित होती थीं। मौजूदा स्थिति यह है कि आधा दर्जन बसें दो दशक से खड़ी खड़ी कबाड़ हो रही हैं।
विज्ञापन
-------
अब ये बसें चलने लायक नहीं रहीं। करीब बीस साल से खड़ी हैं। फैक्ट्री की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इनका मेंटीनेंस नहीं हो सका। इनकी नीलामी क्यों नहीं की गई इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
विज्ञापन
- समय सिंह, उपकार्मिक प्रबंधक आईडीपीएल