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माधोसिंह भंडारी की नृत्य नाटिका के मंचन ने किया दर्शकों को भावविभोर
Updated Sat, 27 Jan 2018 10:41 PM IST
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कीर्तिनगर। ऐतिहासिक मलेथा गांव में वीर माधो सिंह भंडारी सांस्कृतिक व विकास मेला का आयोजन किया गया। इस मौके पर माधो सिंह भंडारी नाटिका का मंचन किया गया।
विकास खंड कीर्तिनगर के मलेथा गांव में आयोजित मेले का शुभारंभ विधायक विनोद कंडारी ने किया। उन्होंने कहा कि माधो सिंह भंडारी के प्रयासों से मलेथा गांव की हरियाली व खेती की पहचान पूरे देश में है । नई पीढ़ी को इस इतिहास जानने की जिज्ञासा रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के सभी गांवों में माधो सिंह भंडारी विकास योजना संचालित करने जा रही है। इस योजना से दूरस्थ गांव के अंतिम व्यक्ति का विकास होगा।
इस मौके पर माधो सिंह भंडारी की कथा का नाटकीय मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से 16 वीं शताब्दी की मलेथा को प्रदर्शित किया गया। तब मलेथा के खेत सूखे थे। वीर भड़ माधो सिंह भंडारी ने चंद्रभागा गाड़ से गूल बनाने का निश्चय किया। पहाड़ी को भेदकर सुरंग वाली गूल बन गई, लेकिन इस पर पानी नहीं चला। ऐसे मेें माधो सिंह के सपने में देवी आती है और उनको सबसे प्रिय वस्तु का बलिदान करने को कहती है। माधो सिंह ने मलेथा की खुशहाली के लिए अपने कलेजे के टुकड़े का बलिदान कर दिया।
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दर्शक माधो सिंह के कृषि के प्रति सोच, त्याग व बलिदान से भावुक हो गए। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष विजय रावत, विपिन भंडारी, सत्यनारायण सेमवाल, ग्राम प्रधान शूरवीर बिष्ट, विपिन पंवार, सच्चिदानंद बडोनी व नरेश आदि मौजूद रहे।
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विकास खंड कीर्तिनगर के मलेथा गांव में आयोजित मेले का शुभारंभ विधायक विनोद कंडारी ने किया। उन्होंने कहा कि माधो सिंह भंडारी के प्रयासों से मलेथा गांव की हरियाली व खेती की पहचान पूरे देश में है । नई पीढ़ी को इस इतिहास जानने की जिज्ञासा रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के सभी गांवों में माधो सिंह भंडारी विकास योजना संचालित करने जा रही है। इस योजना से दूरस्थ गांव के अंतिम व्यक्ति का विकास होगा।
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इस मौके पर माधो सिंह भंडारी की कथा का नाटकीय मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से 16 वीं शताब्दी की मलेथा को प्रदर्शित किया गया। तब मलेथा के खेत सूखे थे। वीर भड़ माधो सिंह भंडारी ने चंद्रभागा गाड़ से गूल बनाने का निश्चय किया। पहाड़ी को भेदकर सुरंग वाली गूल बन गई, लेकिन इस पर पानी नहीं चला। ऐसे मेें माधो सिंह के सपने में देवी आती है और उनको सबसे प्रिय वस्तु का बलिदान करने को कहती है। माधो सिंह ने मलेथा की खुशहाली के लिए अपने कलेजे के टुकड़े का बलिदान कर दिया।
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दर्शक माधो सिंह के कृषि के प्रति सोच, त्याग व बलिदान से भावुक हो गए। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष विजय रावत, विपिन भंडारी, सत्यनारायण सेमवाल, ग्राम प्रधान शूरवीर बिष्ट, विपिन पंवार, सच्चिदानंद बडोनी व नरेश आदि मौजूद रहे।