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नदियां बना दीं कूड़ेदान, छद्म अभियान फिर भी हैं जारी
Updated Tue, 16 Jan 2018 01:33 AM IST
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गंगा मैली की मैली, कागजों में ही सफाई अभियान
-- गंगा स्वच्छता के नाम पर स्वच्छ घाटों पर चलते हैं अभियान
-- लोकल से इंटरनेशनल स्तर के कार्यक्रम, किए जाते हैं बड़े बड़े दावे
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण को लेकर संचालित तमाम योजनाएं फिलहाल हवाई साबित हो रही हैं। तीर्थनगरी में मोक्षदायिनी व अन्य सहायक नदियों की स्थिति और उनके इर्द गिर्द पसरे कूड़े के ढेर इसकी तस्दीक करते हैं। खास बात यह है कि तीर्थनगरी में गंगा के संरक्षण को लेकर लगातार लोकल से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनमें मोक्षदायिनी को स्वच्छ व निर्मल बनाने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। मगर धरातल पर कुछ भी होता नहीं दिखता। नगर क्षेत्र, समीपवर्ती मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम,लक्ष्मणझूला व तपोवन आदि इलाकों में मोक्षदायिनी के किनारे कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बनकर रह गए हैं।
कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था के अभाव में नदी के दोनों तटों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। इससे इतर क्षेत्र में केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना लागू कर गंगा के संरक्षण को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं। यह आलम तब है जबकि नगर क्षेत्र में हर दूसरी सामाजिक संस्था, विभिन्न विद्यालयों की राष्ट्रीय सेवायोजना इकाइयां गंगा के तटों पर स्वच्छता मुहिम लगातार जारी रखे हुई हैं। सप्ताहभर में विभिन्न इलाकों में ऐसे कई स्वच्छता अभियान आयोजित कर दिए जाते हैं, जिनमें लोग नदी किनारे स्वच्छ घाटों पर जुटकर साफ सफाई के नाम पर मीडिया में सुर्खियां बटोर ले जाते हैं। मगर हकीकत यह है कि नदी के जिन तटों पर गंदगी के डंप लगे होते हैं उनकी ओर कोई झांककर भी नहीं देखता।
फोटो सेशन तक सीमित स्वच्छता अभियान
स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह भंडारी, संजय अग्रवाल, सुनील अरोड़ा, धनीराम बिंजोला का कहना है कि इस काम में सामाजिक संस्थाएं ही नहीं गंगा स्वच्छता का दंभ भरने वाली राज्य सरकार भी पीछे नहीं है। गत वर्ष राज्य सरकार की ओर से नदी के तटों पर स्वच्छता अभियान चलाने के लिए बाकायदा दिवस तय किया गया था, जिनमें सरकार के जिम्मेदार नुमाइंदे शामिल हुए थे। वह लोग कार्यकर्ताओं के साथ ऐसे स्थानों पर झाड़ू हाथ में लेकर मीडिया में फोटो सेशन कर चलते बने नदी के जो किनारे अक्सर साफ सुथरे रहते हैं। सरकार के द्वारा चलाई गई इस कथित मुहिम में लक्ष्मणझूला के डीएम कैंप कार्यालय के आसपास नदी किनारे उड़ेली गई गंदगी, थाने के समीप कूड़ेदान बन चुके नाले, तपोवन में लक्ष्मणझूला पुल के समीप और सराय के आसपास का इलाका, मुनिकीरेती में खारास्रोत नदी, ऋषिकेश व मुनिकीरेती की सीमा में स्थापित चंद्रभागा नदी में डंप कूड़े कचरे को नजरअंदाज कर दिया गया।
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ट्रंचिंग ग्राउंड से कूड़ेदान तक नदी किनारे
ऋषिकेश। नदियों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार संस्थाओं में एक नगर निकाय गंगा को मैली करने पर तुली है। दूसरी जिम्मेदार संस्था जिला प्रशासन इस सबकी अनदेखी कर गंगा व सहायक नदियों को प्रदूषित करने में निकायों का सहयोग कर रही हैं। ऋषिकेश नगर निगम का डंपिंग ग्राउंड गंगा से महज कुछ मीटर की दूरी पर बना है, जिसमें जमा गंदगी से नदी मैली हो रही है। निकाय ने बस अड्डा क्षेत्र में कई कूड़ेदान चंद्रभागा नदी के किनारे रखे हुए हैं, जिनकी गंदगी सहायक नदी के जरिए गंगा तक पहुंच रही है। इसके अलावा निगम प्रशासन व वन विभाग के संरक्षण से ट्रांजिट कंपाउंड के आसपास संचालित अवैध टुल्लू पंप चंद्रभागा नदी में संचालित हो रहे हैं, जिनमें वाहनों की धुलाई कर गंदगी नदी में गिराई जा रही है। मुनिकीरेती निकाय का कचरा खारास्रोत नदी के किनारे डंप किया जा रहा है, जबकि लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गंगा से महज कुछ मीटर की दूरी पर कचरा डंपिंग की जा रही है। तपोवन ग्रामसभा से निकलने वाले कचरे को नालों के जरिए गंगा में उड़ेला जा रहा है। मगर इसकी रोकथाम के लिए न तो कोई सरकारी योजना तैयार की गई है और न ही कोई संस्था इन स्थानों पर किसी प्रकार की मुहिम चलाकर कूड़े का उठान करने को तैयार है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नदियों के किनारे कूड़ेदान रखा जाना ठीक नहीं है। यदि नगर निगम द्वारा ऐसा किया गया है तो उसे जल्द हटाने के निर्देश दिए जाएंगे। नगर में डंप कचरे को हटाने के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। जल्द समस्या का निस्तारण करा लिया जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी देहरादून।
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-- गंगा स्वच्छता के नाम पर स्वच्छ घाटों पर चलते हैं अभियान
-- लोकल से इंटरनेशनल स्तर के कार्यक्रम, किए जाते हैं बड़े बड़े दावे
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण को लेकर संचालित तमाम योजनाएं फिलहाल हवाई साबित हो रही हैं। तीर्थनगरी में मोक्षदायिनी व अन्य सहायक नदियों की स्थिति और उनके इर्द गिर्द पसरे कूड़े के ढेर इसकी तस्दीक करते हैं। खास बात यह है कि तीर्थनगरी में गंगा के संरक्षण को लेकर लगातार लोकल से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनमें मोक्षदायिनी को स्वच्छ व निर्मल बनाने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। मगर धरातल पर कुछ भी होता नहीं दिखता। नगर क्षेत्र, समीपवर्ती मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम,लक्ष्मणझूला व तपोवन आदि इलाकों में मोक्षदायिनी के किनारे कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बनकर रह गए हैं।
कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था के अभाव में नदी के दोनों तटों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। इससे इतर क्षेत्र में केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना लागू कर गंगा के संरक्षण को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं। यह आलम तब है जबकि नगर क्षेत्र में हर दूसरी सामाजिक संस्था, विभिन्न विद्यालयों की राष्ट्रीय सेवायोजना इकाइयां गंगा के तटों पर स्वच्छता मुहिम लगातार जारी रखे हुई हैं। सप्ताहभर में विभिन्न इलाकों में ऐसे कई स्वच्छता अभियान आयोजित कर दिए जाते हैं, जिनमें लोग नदी किनारे स्वच्छ घाटों पर जुटकर साफ सफाई के नाम पर मीडिया में सुर्खियां बटोर ले जाते हैं। मगर हकीकत यह है कि नदी के जिन तटों पर गंदगी के डंप लगे होते हैं उनकी ओर कोई झांककर भी नहीं देखता।
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फोटो सेशन तक सीमित स्वच्छता अभियान
स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह भंडारी, संजय अग्रवाल, सुनील अरोड़ा, धनीराम बिंजोला का कहना है कि इस काम में सामाजिक संस्थाएं ही नहीं गंगा स्वच्छता का दंभ भरने वाली राज्य सरकार भी पीछे नहीं है। गत वर्ष राज्य सरकार की ओर से नदी के तटों पर स्वच्छता अभियान चलाने के लिए बाकायदा दिवस तय किया गया था, जिनमें सरकार के जिम्मेदार नुमाइंदे शामिल हुए थे। वह लोग कार्यकर्ताओं के साथ ऐसे स्थानों पर झाड़ू हाथ में लेकर मीडिया में फोटो सेशन कर चलते बने नदी के जो किनारे अक्सर साफ सुथरे रहते हैं। सरकार के द्वारा चलाई गई इस कथित मुहिम में लक्ष्मणझूला के डीएम कैंप कार्यालय के आसपास नदी किनारे उड़ेली गई गंदगी, थाने के समीप कूड़ेदान बन चुके नाले, तपोवन में लक्ष्मणझूला पुल के समीप और सराय के आसपास का इलाका, मुनिकीरेती में खारास्रोत नदी, ऋषिकेश व मुनिकीरेती की सीमा में स्थापित चंद्रभागा नदी में डंप कूड़े कचरे को नजरअंदाज कर दिया गया।
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ट्रंचिंग ग्राउंड से कूड़ेदान तक नदी किनारे
ऋषिकेश। नदियों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार संस्थाओं में एक नगर निकाय गंगा को मैली करने पर तुली है। दूसरी जिम्मेदार संस्था जिला प्रशासन इस सबकी अनदेखी कर गंगा व सहायक नदियों को प्रदूषित करने में निकायों का सहयोग कर रही हैं। ऋषिकेश नगर निगम का डंपिंग ग्राउंड गंगा से महज कुछ मीटर की दूरी पर बना है, जिसमें जमा गंदगी से नदी मैली हो रही है। निकाय ने बस अड्डा क्षेत्र में कई कूड़ेदान चंद्रभागा नदी के किनारे रखे हुए हैं, जिनकी गंदगी सहायक नदी के जरिए गंगा तक पहुंच रही है। इसके अलावा निगम प्रशासन व वन विभाग के संरक्षण से ट्रांजिट कंपाउंड के आसपास संचालित अवैध टुल्लू पंप चंद्रभागा नदी में संचालित हो रहे हैं, जिनमें वाहनों की धुलाई कर गंदगी नदी में गिराई जा रही है। मुनिकीरेती निकाय का कचरा खारास्रोत नदी के किनारे डंप किया जा रहा है, जबकि लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गंगा से महज कुछ मीटर की दूरी पर कचरा डंपिंग की जा रही है। तपोवन ग्रामसभा से निकलने वाले कचरे को नालों के जरिए गंगा में उड़ेला जा रहा है। मगर इसकी रोकथाम के लिए न तो कोई सरकारी योजना तैयार की गई है और न ही कोई संस्था इन स्थानों पर किसी प्रकार की मुहिम चलाकर कूड़े का उठान करने को तैयार है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नदियों के किनारे कूड़ेदान रखा जाना ठीक नहीं है। यदि नगर निगम द्वारा ऐसा किया गया है तो उसे जल्द हटाने के निर्देश दिए जाएंगे। नगर में डंप कचरे को हटाने के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। जल्द समस्या का निस्तारण करा लिया जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी देहरादून।