{"_id":"5a4a68f24f1c1bd0408c01b4","slug":"151482613619-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परंपरा नहीं ईस्ट पूजा के रूप में होती यहां रामलीला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परंपरा नहीं ईस्ट पूजा के रूप में होती यहां रामलीला
Updated Mon, 01 Jan 2018 10:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। ब्लाक के डिम्मर गांव में होने वाली रामलीला इस बार अपना शताब्दी वर्ष मनाएगी। वर्ष 1918 में यहां रामलीला आयोजन की शुरुआत हुई थी। तब यह रामलीला का निरंतर आयोजन हो रहा है। इस आयोजन को ग्रामीण ईष्ट पूजा के रूप में मनाते हैं। बसंत पंचमी के दिन ही यहां रामलीला शुरुआत करने का दिन तय होता है।
डिम्मर गांव में हर वर्ष मार्च माह में गांव की चौंरी (पवित्र स्थल) में रामलीला का आयोजन होता है। इस बार मार्च माह में होने वाली रामलीला 100 वर्ष में प्रवेश कर जाएगी, जिसके लिए गांव में तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। गांव में जहां सुंदरीकरण शुरू हो गया है वहीं रामलीला स्थल पर टाइल्स बिछनी शुरू हो गई हैं। गांव के बुजुर्ग द्वारिका प्रसाद डिमरी बताते हैं कि डिम्मर गांव भगवान बदरीनाथ के पुजारियों का गांव है। लिहाजा बसंत पंचमी को एक ओर टिहरी दरबार में बदरीविशाल के कपाटोद्घाटन का समय निर्धारित होता है, तो वहीं दूसरी ओर गांव की चौंरी में लोग पंचांग देखकर रामलीला शुभारंभ करने का समय निर्धारित करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1918 में यहां ज्ञानानंद डिमरी और सहयोगियों ने रामलीला की शुरुआत की थी, जिसमें गांव के रामचंद्र ने श्रीराम का अभिनय किया। वहीं महेशानंद डिमरी लक्ष्मण, गोविंद ने सीता का अभिनय किया। नारायण दत्त डिमरी ने परशुराम तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जीवानंद खंडूड़ी ने रावण का अभिनय किया था। रामलीला समिति के वर्तमान अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है कि इस बार शताब्दी समारोह को भव्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जनवरी माह से आयोजन के तहत होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
डिम्मर गांव में हर वर्ष मार्च माह में गांव की चौंरी (पवित्र स्थल) में रामलीला का आयोजन होता है। इस बार मार्च माह में होने वाली रामलीला 100 वर्ष में प्रवेश कर जाएगी, जिसके लिए गांव में तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। गांव में जहां सुंदरीकरण शुरू हो गया है वहीं रामलीला स्थल पर टाइल्स बिछनी शुरू हो गई हैं। गांव के बुजुर्ग द्वारिका प्रसाद डिमरी बताते हैं कि डिम्मर गांव भगवान बदरीनाथ के पुजारियों का गांव है। लिहाजा बसंत पंचमी को एक ओर टिहरी दरबार में बदरीविशाल के कपाटोद्घाटन का समय निर्धारित होता है, तो वहीं दूसरी ओर गांव की चौंरी में लोग पंचांग देखकर रामलीला शुभारंभ करने का समय निर्धारित करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1918 में यहां ज्ञानानंद डिमरी और सहयोगियों ने रामलीला की शुरुआत की थी, जिसमें गांव के रामचंद्र ने श्रीराम का अभिनय किया। वहीं महेशानंद डिमरी लक्ष्मण, गोविंद ने सीता का अभिनय किया। नारायण दत्त डिमरी ने परशुराम तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जीवानंद खंडूड़ी ने रावण का अभिनय किया था। रामलीला समिति के वर्तमान अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है कि इस बार शताब्दी समारोह को भव्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जनवरी माह से आयोजन के तहत होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
विज्ञापन