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हाथ्यूं तौछिया बजै दे रम्मा झम्मा....पर झूमे
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:18 PM IST
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गौचर। 67वें औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या पर विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लोक गीत और लोक नृत्य की धुन पर मंच पर थिरकते बाल कलाकारों ने देव स्तुतियों के साथ गंगा को मैली होने से बचाने का आह्वान किया। साथ ही बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम की शुुरुआत मां गंगा को पवित्र पावन बनाए रखने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर गौचर के छात्रों की गंदलु कर्याली हमनु तेरू छालू पाणि गंगा जी, मां का दूध लाज भी नि राखि जाणि गंगा जी... की सुमधुर प्रस्तुति से हुई। जीतू बगड़वाल नृत्य नाटिका.., सोभनी बांधा, हाथ्यूं तौछिया बजै दे रम्मा झम्मा.., पहाड़ की खेती सर्ग विधाता का सारा..., स्याली बंपाली..., लाली ओ लाली... और साट्यूं की मंडवाण...भालु सुबेर मालू पाणि में मिलला.. आदि प्रस्तुतियों से छात्र कलाकारों ने मेला पंडाल में लोक संस्कृति के रंग जमाए रखे। छात्रों के लोकनृत्य में जल जंगल जमीन के संरक्षण, पहाड़ की नारी की व्यथा, काफल पाको, मैन नि चाखो गीत से मां बेटी का मर्म भी था, तो कफू हिलांस, घुगूती और न्योली का दर्द भी कलाकारों ने बयां किया। रात साढ़े 11 बजे तक चले शिक्षण कार्यक्रम के बाद लोक जागृति संस्था कर्णप्रयाग के कलाकारों ने आधा घंटे की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने हिमवंत देश होला त्रिजुगी नारेण... और बिंदुली रात रेगे जरासि.. आदि गीतों की प्रस्तुति से सांस्कृतिक संध्या का समापन किया। इस अवसर पर विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, डायट के प्राचार्य के. सिंह, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष गजेंद्र नयाल, अनिल नेगी, सुनील शैली, नवीन टाकुली, सुरेश कुमार, भगवती प्रसाद और अनिल बिष्ट आदि मौजूद थे।
मेले में आज
- सुबह 7:00 बजे से भारत स्वाभिमान द्वारा योग शिविर।
- सुबह 9:00 बजे से खेल कूद प्रतियोगिताएं।
- दोपहर 12:00 बजे से कृषि उद्यान गोष्ठी।
- अपराह्न 4:00 बजे से थारू जनजाति समिति सितारगंज द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- रात्रि 8:00 बजे से कुमाऊंनी छोलिया नृत्य।
- रात्रि 9:00 बजे से फौजी ललित मोहन जोशी की सांस्कृतिक संध्या।
कार्यक्रम की शुुरुआत मां गंगा को पवित्र पावन बनाए रखने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर गौचर के छात्रों की गंदलु कर्याली हमनु तेरू छालू पाणि गंगा जी, मां का दूध लाज भी नि राखि जाणि गंगा जी... की सुमधुर प्रस्तुति से हुई। जीतू बगड़वाल नृत्य नाटिका.., सोभनी बांधा, हाथ्यूं तौछिया बजै दे रम्मा झम्मा.., पहाड़ की खेती सर्ग विधाता का सारा..., स्याली बंपाली..., लाली ओ लाली... और साट्यूं की मंडवाण...भालु सुबेर मालू पाणि में मिलला.. आदि प्रस्तुतियों से छात्र कलाकारों ने मेला पंडाल में लोक संस्कृति के रंग जमाए रखे। छात्रों के लोकनृत्य में जल जंगल जमीन के संरक्षण, पहाड़ की नारी की व्यथा, काफल पाको, मैन नि चाखो गीत से मां बेटी का मर्म भी था, तो कफू हिलांस, घुगूती और न्योली का दर्द भी कलाकारों ने बयां किया। रात साढ़े 11 बजे तक चले शिक्षण कार्यक्रम के बाद लोक जागृति संस्था कर्णप्रयाग के कलाकारों ने आधा घंटे की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने हिमवंत देश होला त्रिजुगी नारेण... और बिंदुली रात रेगे जरासि.. आदि गीतों की प्रस्तुति से सांस्कृतिक संध्या का समापन किया। इस अवसर पर विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, डायट के प्राचार्य के. सिंह, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष गजेंद्र नयाल, अनिल नेगी, सुनील शैली, नवीन टाकुली, सुरेश कुमार, भगवती प्रसाद और अनिल बिष्ट आदि मौजूद थे।
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मेले में आज
- सुबह 7:00 बजे से भारत स्वाभिमान द्वारा योग शिविर।
- सुबह 9:00 बजे से खेल कूद प्रतियोगिताएं।
- दोपहर 12:00 बजे से कृषि उद्यान गोष्ठी।
- अपराह्न 4:00 बजे से थारू जनजाति समिति सितारगंज द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- रात्रि 8:00 बजे से कुमाऊंनी छोलिया नृत्य।
- रात्रि 9:00 बजे से फौजी ललित मोहन जोशी की सांस्कृतिक संध्या।