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सता के गलियारों में भटकी बाबा की शहादत
Updated Tue, 08 Aug 2017 10:32 PM IST
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आदिबदरी। गैरसैंण राजधानी सहित पहाड़ी राज्य के विकास के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले बाबा मोहन उत्तराखंडी की शहादत आज सत्ता के गलियारों में गुम होकर रह गई है। बाबा की 13वीं पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि बाबा मोहन उत्तराखंडी ने आठ से अधिक बार गैरसैंण राजधानी के लिए आंदोलन किया और अपने आठवें आंदोलन के दौरान आठ अगस्त 2004 को अपने प्राण त्याग दिए।
तहसील मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता धर्म सिंह नेगी ने कहा कि गैरसैंण को इस पहाड़ी राज्य की राजधानी बनाना बाबा मोहन उत्तराखंडी का संकल्प था। गैरसैंण राजधानी, बेनीताल को पर्यटक स्थल सहित अन्य मांगों को लेकर बाबा ने भूखहड़ताल की थी। आठ अगस्त 2004 को बेनीताल में अपने भूखहड़ताल के 38वें दिन बाबा ने कहा था कि उनकी मौत बशर्ते हो जाए, लेकिन गैरसैंण राजधानी बनाने की लड़ाई जारी रहनी चाहिए। इसी दिन उन्होंने प्राण त्याग दिए, उनकी यह लड़ाई आज सत्ता के गलियारों में भटक गई है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। इस अवसर पर हरेंद्र रावत, रघुवीर लाल, पंकज बहुगुणा, विक्रम कुंवर, प्रदीप नवानी, ममता खंडूड़ी और संदीप कुमार आदि मौजूद थे।
इंसेट
शहादत पर लगता है मेला
कर्णप्रयाग। बाबा की शहादत में हर साल 9 अगस्त को बेनीताल में एक दिवसीय शहीद मेले का आयोजन किया जाता है। बुधवार को होने वाले इस मेले की तैयारियां पूरी हो गई हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मिंगवाल का कहना है कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा बाबा के स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा।
तहसील मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता धर्म सिंह नेगी ने कहा कि गैरसैंण को इस पहाड़ी राज्य की राजधानी बनाना बाबा मोहन उत्तराखंडी का संकल्प था। गैरसैंण राजधानी, बेनीताल को पर्यटक स्थल सहित अन्य मांगों को लेकर बाबा ने भूखहड़ताल की थी। आठ अगस्त 2004 को बेनीताल में अपने भूखहड़ताल के 38वें दिन बाबा ने कहा था कि उनकी मौत बशर्ते हो जाए, लेकिन गैरसैंण राजधानी बनाने की लड़ाई जारी रहनी चाहिए। इसी दिन उन्होंने प्राण त्याग दिए, उनकी यह लड़ाई आज सत्ता के गलियारों में भटक गई है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। इस अवसर पर हरेंद्र रावत, रघुवीर लाल, पंकज बहुगुणा, विक्रम कुंवर, प्रदीप नवानी, ममता खंडूड़ी और संदीप कुमार आदि मौजूद थे।
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शहादत पर लगता है मेला
कर्णप्रयाग। बाबा की शहादत में हर साल 9 अगस्त को बेनीताल में एक दिवसीय शहीद मेले का आयोजन किया जाता है। बुधवार को होने वाले इस मेले की तैयारियां पूरी हो गई हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मिंगवाल का कहना है कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा बाबा के स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा।
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