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डीएम ने मारा छापा, मिले पुराने स्टांप
Updated Tue, 01 Aug 2017 10:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने एक स्टॉप विक्रेता के काउंटर पर छापा मारा तो वहां भारी अनियमितताएं मिली। मौके पर पुरानी तारीखों के स्टॉप मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। स्टांप विक्रेता का रजिस्टर कब्जे में ले लिया गया है, जबकि स्टांप गिनकर उसे लौटा दिए गए। जिलाधिकारी ने जांच के आदेश देते हुए कहा कि दोषी पाए जाने पर स्टांप विक्रेता का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
सुबह 11 बजे जिलाधिकारी ने तहसील परिसर का औचक निरीक्षण किया। तहसील गेट के पास डीएम स्टापं विक्रेता सतेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन के काउंटर पर पहुंचे। उन्होंने काउंटर पर मौजूद व्यक्ति से स्टांप पेपरों के बारे में जानकारी मांगी। संबंधित व्यक्ति की ओर से जानकारी न दे पाने पर जिलाधिकारी ने उसे फटकार लगाते हुए रजिस्टर दिखाने को कहा। पाया कि रजिस्टर में भी प्रविष्टि पूरी नहीं थी। सारे स्टांप चढ़ाए नहीं गए थे, कई पेज खाली छोड़े गए थे जबकि अन्य डाटा भी अधूरे थे। जिलाधिकारी ने काउंटर में रखे स्टाप पेपर निकालने शुरू किए । स्टांप विक्रेता ने कई स्टांप पेपर छिपाकर रखे थे। उसके बताने पर घर पर रखे गए स्टांप पेपर भी मंगवाए गए।
उसके स्टॉक में 25 हजार, 15 हजार, 10 हजार के कई स्टांप पेपर ऐसे मिले लेकिन स्टॉक रजिस्टर में उनकी एंट्री नहीं थी। इसके अलावा भी एक हजार, 500, 100 और दस रुपये के भी स्टांप पेपर मिले है। खास बात यह रही कि विक्रेता के पास जुलाई वर्ष 2016 के स्टांप पेपर भी मिले हैं। कुल मिलाकर करीब दस हजार स्टांप कब्जे में लिए गए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि करीब एक महीने पहले उन्होंने तहसील का निरीक्षण किया था उस समय सभी स्टांप विक्रेताओं को हिदायत दी गई थी कि वे अपने काउंटर के पास स्टॉक की पूरी जानकारी, नाम पट्टिका आदि प्रदर्शित करेंगे ताकि लोगों को पता चले कि किस विक्रेता के पास कौन-कौन से स्टांप पेपर उपलब्ध हैं। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि ब्लैक में स्टांप बेचने की भी शिकायत मिल रही थी। जिलाधिकारी ने कहा कि बरामद स्टांप पेपरों की गिनती की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। स्टांप विक्रेता का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।
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छापे के दौरान एसडीएम मनीष कुमार सिंह, नगर मजिस्ट्रेट जयभारत सिंह, तहसीलदार सुनैना राणा आदि भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी के छापे पर अन्य स्टांप विक्रेता अपने काउंटर बढ़ाकर इधर-उधर हो गए। टीनशेड डालकर बनाई गई फोटो स्टेट की एक दुकान भी सील करा दी गई। एसडीएम मनीष कुमार सिंह ने बताया कि स्टांप विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है।
दो दिन पहले सात हजार का स्टांप बिका
हरिद्वार। सोमवार को जिलाधिकारी की ओर से रोशनाबाद स्थित कार्यालय में शिकायत सुनने के दौरान एक व्यक्ति ने बताया था कि तहसील में बैक डेट के स्टांप पेपर बेचे जा रहे हैं। यह भी बताया गया था कि दो दिन पहले तहसील से बैकडेट का एक स्टांप पेपर सात हजार रुपये में बेचा गया है, जबकि स्टांप मात्र दस रुपये का था।
अब एक भी स्टांप विक्रेता को नहीं मिलेगा लाइसेंस
हरिद्वार। जिलाधिकारी ने छापेमारी के बाद सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने तहसीलदार सुनैना राणा को आदेश दिया कि तहसील परिसर में किसी भी स्टांप विक्रेता के लाइसेंस की संस्तुति न की जाए। उन्होंने एक पत्र और रिपोर्ट उनके पास बनाकर भेजने के लिए कहा जिस पर स्टांप विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सके और आगे भी लाइसेंस जारी करने पर रोक लग सके।
हरिद्वार।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने एक स्टॉप विक्रेता के काउंटर पर छापा मारा तो वहां भारी अनियमितताएं मिली। मौके पर पुरानी तारीखों के स्टॉप मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। स्टांप विक्रेता का रजिस्टर कब्जे में ले लिया गया है, जबकि स्टांप गिनकर उसे लौटा दिए गए। जिलाधिकारी ने जांच के आदेश देते हुए कहा कि दोषी पाए जाने पर स्टांप विक्रेता का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
सुबह 11 बजे जिलाधिकारी ने तहसील परिसर का औचक निरीक्षण किया। तहसील गेट के पास डीएम स्टापं विक्रेता सतेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन के काउंटर पर पहुंचे। उन्होंने काउंटर पर मौजूद व्यक्ति से स्टांप पेपरों के बारे में जानकारी मांगी। संबंधित व्यक्ति की ओर से जानकारी न दे पाने पर जिलाधिकारी ने उसे फटकार लगाते हुए रजिस्टर दिखाने को कहा। पाया कि रजिस्टर में भी प्रविष्टि पूरी नहीं थी। सारे स्टांप चढ़ाए नहीं गए थे, कई पेज खाली छोड़े गए थे जबकि अन्य डाटा भी अधूरे थे। जिलाधिकारी ने काउंटर में रखे स्टाप पेपर निकालने शुरू किए । स्टांप विक्रेता ने कई स्टांप पेपर छिपाकर रखे थे। उसके बताने पर घर पर रखे गए स्टांप पेपर भी मंगवाए गए।
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उसके स्टॉक में 25 हजार, 15 हजार, 10 हजार के कई स्टांप पेपर ऐसे मिले लेकिन स्टॉक रजिस्टर में उनकी एंट्री नहीं थी। इसके अलावा भी एक हजार, 500, 100 और दस रुपये के भी स्टांप पेपर मिले है। खास बात यह रही कि विक्रेता के पास जुलाई वर्ष 2016 के स्टांप पेपर भी मिले हैं। कुल मिलाकर करीब दस हजार स्टांप कब्जे में लिए गए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि करीब एक महीने पहले उन्होंने तहसील का निरीक्षण किया था उस समय सभी स्टांप विक्रेताओं को हिदायत दी गई थी कि वे अपने काउंटर के पास स्टॉक की पूरी जानकारी, नाम पट्टिका आदि प्रदर्शित करेंगे ताकि लोगों को पता चले कि किस विक्रेता के पास कौन-कौन से स्टांप पेपर उपलब्ध हैं। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि ब्लैक में स्टांप बेचने की भी शिकायत मिल रही थी। जिलाधिकारी ने कहा कि बरामद स्टांप पेपरों की गिनती की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। स्टांप विक्रेता का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।
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छापे के दौरान एसडीएम मनीष कुमार सिंह, नगर मजिस्ट्रेट जयभारत सिंह, तहसीलदार सुनैना राणा आदि भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी के छापे पर अन्य स्टांप विक्रेता अपने काउंटर बढ़ाकर इधर-उधर हो गए। टीनशेड डालकर बनाई गई फोटो स्टेट की एक दुकान भी सील करा दी गई। एसडीएम मनीष कुमार सिंह ने बताया कि स्टांप विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है।
दो दिन पहले सात हजार का स्टांप बिका
हरिद्वार। सोमवार को जिलाधिकारी की ओर से रोशनाबाद स्थित कार्यालय में शिकायत सुनने के दौरान एक व्यक्ति ने बताया था कि तहसील में बैक डेट के स्टांप पेपर बेचे जा रहे हैं। यह भी बताया गया था कि दो दिन पहले तहसील से बैकडेट का एक स्टांप पेपर सात हजार रुपये में बेचा गया है, जबकि स्टांप मात्र दस रुपये का था।
अब एक भी स्टांप विक्रेता को नहीं मिलेगा लाइसेंस
हरिद्वार। जिलाधिकारी ने छापेमारी के बाद सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने तहसीलदार सुनैना राणा को आदेश दिया कि तहसील परिसर में किसी भी स्टांप विक्रेता के लाइसेंस की संस्तुति न की जाए। उन्होंने एक पत्र और रिपोर्ट उनके पास बनाकर भेजने के लिए कहा जिस पर स्टांप विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सके और आगे भी लाइसेंस जारी करने पर रोक लग सके।